bareillylive : वर्षों पुराने वृक्षों की संवहन और कुशल कूड़ा प्रबंधन के चलते बरेली छावनी परिषद ने पर्यावरण संरक्षण में अहम सफलता हासिल की है। स्थानीय प्रशासन और वन विभाग के संयुक्त प्रयास से छावनी में व्यापक हरित पट्टियाँ व घने जंगल बनाए गए हैं, साथ ही वेस्ट‑टू‑एनर्जी संयंत्र से कचरे का वैज्ञानिक उपयोग कर इसे देश का पहला “कार्बन‑निगेटिव” (कार्बन निगेटिव) छावनी घोषित किया गया है।
टीईआरआई (द एनर्जी एंड रिसोर्सेज़ इंस्टीट्यूट) के वैज्ञानिकों ने छावनी क्षेत्र की वार्षिक कार्बन शोषण क्षमता का आकलन करते हुए कहा है कि यह क्षेत्र प्रतिवर्ष लगभग 60,000 टन कार्बन‑डाइऑक्साइड के बराबर कार्बन को सोखने की क्षमता रखता है। साथ ही वेस्ट‑टू‑एनर्जी प्लांट में प्रतिदिन 35–40 टन कचरे से बिजली और बायो‑सीएनजी का उत्पादन होता है, जिससे छावनी की कुल कार्बन‑उत्पादन शून्य से नीचे आकर निगेटिव श्रेणी में पहुंच गई है।
प्रशासन ने कहा कि पुराने वृक्षों की रक्षा, नए पौधारोपण, हरित बेल्ट का संवर्धन और कचरा प्रबंधन की जिम्मेदारी स्थानीय नागरिकों, शिक्षण संस्थानों और स्वयंसेवक संगठनों के साथ मिलकर निभाई गई। वेस्ट‑टू‑एनर्जी परियोजना ने न केवल कचरा घटाया बल्कि हरित ऊर्जा के रूप में उपयोगी उत्पादन कर पारंपरिक जीवाश्म‑ईंधन पर निर्भरता भी कम की। इन पहलों से स्थानीय वायु गुणवत्ता में सुधार और शहरी ऊष्मा प्रभाव में कमी का भी सकारात्मक असर दिख रहा है।
कार्बन उत्सर्जन क्या है और इसके नुकसान
कार्बन उत्सर्जन से तात्पर्य हवा में कार्बन‑डाइऑक्साइड (CO2) तथा अन्य ग्रीनहाउस गैसों (जैसे मीथेन, नाइट्रस ऑक्साइड) का उत्सर्जन है, जो मुख्यतः जीवाश्म ईंधन जलाने, औद्योगिक प्रक्रियाओं, वन कटाई और कृषि गतिविधियों से होता है। ये गैसें वायुमंडल में गर्मी को रोकती हैं और ग्लोबल वार्मिंग अर्थात् तापमान वृद्धि का कारण बनती हैं। इसके नुकसान में शामिल हैं:
वैश्विक तापमान वृद्धि: तापन से समुद्र स्तर बढ़ता है और गर्मी‑तरंग जैसी अतिवृत्तियाँ बढ़ती हैं।
चरम मौसम घटनाएँ: बाढ़, सूखा, चक्रवाती तूफान और अनियमित मौसमी पैटर्न बढ़ते हैं।
पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव: जैव विविधता घटती है, पशु‑पक्षी और पौधे प्रभावित होते हैं।
सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम: वायु‑दूषण और ऊष्मा की वजह से श्वसन एवं हृदय रोग बढ़ते हैं।
आर्थिक नुकसान: कृषि, मछली पालन, अवसंरचना और आवास पर बड़ा आर्थिक प्रभाव पड़ता है।
बरेली छावनी की यह उपलब्धि न केवल स्थानीय स्तर पर स्वच्छ वायु और ऊर्जा‑सुरक्षा सुनिश्चित करेगी, बल्कि अन्य शहरी निकायों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगी। परिषद ने आगे कहा है कि वे इस मॉडल को और मजबूती देने तथा आसपास के इलाकों में फैलाने के लिए योजनाएं बना रहे हैं।






Leave a Reply