राजकोट, गुजरात: गुजरात के राजकोट में पाकिस्तान से आए 319 विस्थापित लोगों को भारतीय नागरिकता प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को प्रमुख स्वामी ऑडिटोरियम में आयोजित विशेष समारोह में गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने लाभार्थियों को नागरिकता प्रमाणपत्र सौंपे। नागरिकता मिलने के साथ ही इन परिवारों के लंबे इंतजार और अनिश्चितता के दौर के समाप्त होने की उम्मीद जगी है।
राजकोट, मोरबी, कच्छ और सुरेंद्रनगर के लोगों को मिला लाभ
नागरिकता प्रमाणपत्र प्राप्त करने वाले 319 लोगों में सबसे अधिक 259 लाभार्थी राजकोट जिले के हैं। इसके अलावा मोरबी जिले के 53, कच्छ के 6 और सुरेंद्रनगर जिले के एक व्यक्ति को भारतीय नागरिकता प्रदान की गई। यह कार्यक्रम नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत पात्र विस्थापितों को नागरिकता देने की प्रक्रिया का हिस्सा था।
समारोह के दौरान कई लाभार्थी भावुक नजर आए। प्रमाणपत्र मिलने पर परिवारों ने खुशी जाहिर की और इसे अपने जीवन की नई शुरुआत बताया।
हर्ष संघवी ने दी लाभार्थियों को बधाई
समारोह को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने नागरिकता प्राप्त करने वाले सभी लोगों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि अब ये परिवार भारतीय नागरिक के रूप में अपना जीवन आगे बढ़ा सकेंगे। उन्होंने इस प्रक्रिया का श्रेय केंद्र सरकार के फैसलों और नागरिकता संशोधन अधिनियम के क्रियान्वयन को दिया।
संघवी ने पाकिस्तान से आए विस्थापित परिवारों की कठिनाइयों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय नागरिकता मिलने से उन्हें सुरक्षा, पहचान और सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर मिलेगा।
क्या है नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA)?
नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 भारत में नागरिकता प्राप्त करने के लिए एक विशेष कानूनी प्रावधान है। इसके तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के पात्र व्यक्तियों के लिए नागरिकता प्राप्त करने का मार्ग उपलब्ध कराया गया है। इसके लिए अधिनियम में निर्धारित अन्य शर्तों को पूरा करना भी आवश्यक है।
राजकोट में आयोजित यह समारोह गुजरात में पात्र विस्थापितों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने की प्रक्रिया की एक महत्वपूर्ण कड़ी रहा। नागरिकता प्रमाणपत्र मिलने के बाद लाभार्थियों को भारतीय नागरिक के रूप में अपनी कानूनी पहचान स्थापित करने का अवसर मिलेगा।







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