कुक्कुट नवाचार से आत्मनिर्भर भारत को मिलेगी मजबूती : डॉ. जगबीर सिंह त्यागी

सीएआरआई में 2 नवंबर को लगेगा विराट कुक्कुट मेला, 50 से अधिक स्टालों पर प्रदर्शित होंगी आधुनिक तकनीकें और उन्नत नस्लें

बरेली@bareillylive:बरेली। केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान (सीएआरआई), इज्जतनगर का 48वां स्थापना दिवस 2 नवंबर को धूमधाम से मनाया जाएगा। इस अवसर पर संस्थान परिसर में विराट कुक्कुट मेला एवं कुक्कुट कृषक संगोष्ठी आयोजित की जाएगी। ‘कुक्कुट नवाचार प्रौद्योगिकियां : आत्मनिर्भर भारत’ थीम पर आधारित इस आयोजन में 50 से अधिक स्टाल लगाए जाएंगे। साथ ही विभिन्न प्रजातियों के जीवित पक्षियों की प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र रहेगी।

संस्थान के निदेशक डॉ. जगबीर सिंह त्यागी ने प्रेसवार्ता में बताया कि वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से कुक्कुट पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। कम भूमि और कम समय में बेहतर आमदनी देने वाला यह व्यवसाय ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध करा सकता है।

उन्होंने कहा कि उन्नत नस्लों, संतुलित आहार, वैज्ञानिक प्रबंधन और प्रभावी रोग नियंत्रण तकनीकों को अपनाकर कुक्कुट पालन को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है। इसके लिए किसानों तक आधुनिक अनुसंधान और तकनीकी जानकारियां पहुंचाना जरूरी है।

डॉ. त्यागी ने बताया कि वर्ष 1979 में स्थापित केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान अब तक लगभग 40 उन्नत जर्मप्लाज्म लाइनों, किस्मों और क्रॉस के विकास में योगदान दे चुका है। संस्थान की ओर से विकसित कैरी देवेंद्र, कैरी निर्भीक, हितकारी उपकारी और कैरी गोल्डन जैसी किस्में किसानों के लिए उपयोगी साबित हो रही हैं।

वैज्ञानिकों और किसानों को मिलेगा संवाद का मंच

स्थापना दिवस समारोह के मुख्य अतिथि राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, बीकानेर के कुलपति डॉ. सुमंत व्यास होंगे। वहीं, आईसीएआर के सहायक महानिदेशक डॉ. एचके नरूला विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

मेले में 25 से अधिक कंपनियों के प्रतिनिधि भी भाग लेंगे। यहां वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों और कुक्कुट पालकों को एक मंच पर लाकर आधुनिक तकनीकों, प्रशिक्षण, उद्यमिता और व्यावसायिक संभावनाओं पर चर्चा की जाएगी।

संस्थान का उद्देश्य वैज्ञानिक नवाचारों को किसानों तक पहुंचाकर कुक्कुट पालन को लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित करना है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के अवसर बढ़ने के साथ आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी मजबूती मिल सके।

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