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सोमवती अमावस्या पर गंगा स्नान के दौरान 40 डूबे, तीन बच्चों की मौत

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कछला (बदायूं)। सोमवती अमावस्या को तीन घरों के चिराग बुझ गये। यहां स्नान के दौरान गंगा के सड़क और रेलवे के पुल के खम्भों के पास 40 लोग डूब गये। इनमें से 37 लोगों को गोताखोरों ने बचा लिया जबकि तीन बच्चों की मौत हो गयी।

मरने वालों में दो बच्चे चचेरे-तहेरे भाई हैं। सोमवती अमावस्या पर आसपास सहित राजस्थान और मध्यप्रदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान करने पहुंचे थे। राजस्थान के दौसा जनपद के थाना बांदीकुई के गांव निहालपुरा निवासी केशराम और चेतराम परिवार सहित बस से गंगा स्नान करने आए थे। सुबह दस बजे के लगभग वह परिवार के सदस्यों के साथ सड़क पुल के समीप गंगा स्नान कर रहे थे। स्नान करते समय चचेरे-तहेरे भाई दिलखुश (दस वर्ष) और नितेश (11 वर्ष) पुल के खंबे के पास गहरे पानी में डूब गए। उस ओर परिवार के किसी सदस्य का ध्यान ही नहीं गया।

कुछ देर बाद परिजनों को दिलखुश और नितेश नजर नहीं आए तो उन्होंने दोनों को खोजना शुरू कर दिया। नहीं मिलने पर गोताखोरों से गंगा में तलाश करने के लिए कहा। गोताखोरों ने दोनों बच्चों को पिलर के नीचे से बेहोशी की हालत में निकाला। उन्हें डायल 100 पुलिस की गाड़ी सीएचसी लेकर पहुंची। वहां चिकित्सकों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। परिजनों के पोस्टमार्टम से इनकार करने पर पुलिस ने शवों को परिजनों के हवाले कर दिया।

दोपहर बाद गंगा में राजस्थान के धौलपुर जनपद के गांव भैंसाना निवासी नेम सिंह का चार वर्षीय पुत्र शिवम मां के साथ गंगा स्नान करते समय डूब गया। मां को इसकी जानकारी नहीं हो सकी। गंगा से बाहर निकली मां ने बालक को न देखा तो शोर मचाया। इसके बाद गोताखोरों ने उसे मृत अवस्था में गंगा से बाहर निकाला। गोताखोरों की मानें तो गंगा में स्नान करते समय मथुरा के मनोज, दौसा राजस्थान के मैकू, भरतपुर के शिव सिंह, अलीगढ़ के देव सिंह, सिकंरपुर की आरती और चंद्रकली दोनों सगी बहनें, फिरोजाबाद के कांताप्रसाद पुत्र सोहन लाल सहित 40 लोग भी डूबे थे, लेकिन उन्हें समय रहते बचा लिया गया। गोताखोरों ने बताया कि गंगा में पानी कम होने के कारण दूरदराज से आए श्रद्धालुओं को पता नहीं था कि गंगा के पुल के खंभों के पास गहराई ज्यादा है। लोगों को इस संबंध में सचेत भी किया गया था, लेकिन इसके बाद भी हादसे हो गए।

खंभों के आसपास नहीं की गई बेरिकेडिंग

सोमवती अमावस्या पर प्रशासन की ओर से सुरक्षा की दृष्टि से पुल के खंभों के आसपास कोई बेरिकेडिंग नहीं की गई थी। यही कारण है कि लोग चेतावनी के बाद पुल के पिलरों के पास गंगा स्नान करने के लिए पहुंच गए। नाविकों रोकने का प्रयास भी किया तो कई श्रद्धालु उनसे झगड़े पर अमादा हो गए। इसके परिणाम स्वरूप तीन लोगों की गंगा में डूबने से मौत हो गई।

साभार हिन्दुस्तान

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