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पहिया टूटने से पलट सकती थी गरबा एक्सप्रेस, गरम हो गया था एक्सेल

हावड़ा से गुजरात के गांधीधाम जा रही थी इस ट्रेन का एक्सेल गर्म होगया था जिसका एचबीडी ने समय रहते पता लगा लिया। इसके बाद ट्रेन को कानपुर सेंट्रल स्टेशन लाकरसंबंधित कोच को बदला गया।

कानपुर। यह आधुनिक तकनीक का कमाल ही है कि सैकड़ों रेलयात्री सुरक्षित बच गए।यह ट्रेन थी गरबा एक्सप्रेस जो हावड़ा से गांधीधाम (गुजरात) जा रही थी। हॉट बॉक्सडिटेक्टर (HBD) ने इसे दुर्घटनाग्रस्तहोने से बचा लिया। चुनार (मिर्जापुर) स्टेशन पर लगी इस डिवाइस ने भांप लिया किपहिये में लगा एक्सेल गर्म हो रहा है। इसके बाद ट्रेन को धीमी गति से कानपुरसेंट्रल स्टेशन लाकर संबंधित कोच को बदला गया। ऐसा न किया जाता तो पहिया टूट सकताथा। कानपुर सेंट्रल आने के करीब सवा दो घंटे बाद ट्रेन को 12 बजे रवाना किया गया। 

चुनार में एक्सेल गरम होने की जानकारी के बाद मैकेनिकल विभाग के एक सुपरवाइजर के साथ ट्रेन को रवाना किया गया। धीमी गति सेट्रेन को सेंट्रल स्टेशन पर लाया गया। मंगलवार रात 9:43 बजे ट्रेन प्लेटफार्म नंबर एक पर पहुंची। यहां मैकेनिकल विभाग के इंजीनियरोंने जांच की। तय हुआ कि इस कोच को बदल देना बेहतर होगा। इस पर कोच बदलकर ट्रेन कोरात 12 बजे रवाना किया गया। करीबसवा दो घंटे तक प्लेटफार्म नंबर पर एक पर ट्रेन खड़ी रहने की वजह से श्रमशक्तिएक्सप्रेस को चार नंबर से चलाया गया।

क्या है हॉट बॉक्स डिटेक्टर

हॉट बॉक्स डिटेक्टर पटरी पर लगाया जाता है। इसमें तापमान मापक यंत्र के अलावा केबल होता है। यह पूरा सिस्टम इंफ्रारेड (गर्मी से निकलने वाली किरणें) किरणों से चलता है। इनकी ऑनलाइन मॉनीटरिंग होती है। ट्रेन के गुजरने पर पहिये का एक्सेल (धुरा) अगर गर्म हुआ तो उससे निकलने वाली इंफ्रारेड किरणें बॉक्स पर पड़ती हैं और तापमान कितना है यह पता चल जाता है। अत्याधिक गर्म होने पर बॉक्स तुरंत तापमान अधिक होने की जानकारी दे देता है और इसकी सूचना रेलवे कंट्रोल रूम में जाती है। इससे खराबी पता चल जाती है और मरम्मत कराई जाती है।

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