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सबरीमाला मंदिर में सनातन परम्परा तोड़ने के खिलाफ सड़क पर उतरे हिन्दू

बरेली। सबरीमला मंदिर में भगवान अयप्पा के दर्शनों के लिए मंदिर में महिलाओं का जबरन प्रवेश कराने से हिन्दुओं में आक्रोश पनप रहा है। रविवार को बरेली में अनेक हिन्दू संगठनों और हिन्दू बुद्धिजीवियों ने डीडीपुरम चौराहा स्थित शहीद चौक पर विरोध प्रदर्शन किया। इन लोगों ने भगवान अयप्पा के मंदिर में आठ सौ साल पुरानी परम्परा तोड़ने को एक गहरी साजिश करार दिया। लोगों ने मानव श्रृंखला बनाकर सड़क जाम भी की।

बता दें कि करीब 800 सालों से केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं का प्रवेश निषिद्ध है। हाल ही में दो महिलाओं को पिछले दरवाजे से जबरन प्रवेश कराने के बाद हिन्दू जनमानस में आक्रोश पनप रहा है।

रविवार को दोपहर बरेली में डीडीपुरम चौराहे के पास शहीद चौक पर हिन्दू संगठनों के लोग एकत्र हुए। यहां इन लोगों ने मानव श्रृंखला बनाकर विरोध जताया। प्रदर्शनकारी अपने हाथों में स्वामी शरणम् अयप्पा, हिन्दुवः सहोदरा सर्वे, और सेव सबरीमाला जैसे नारे लिखी तख्तियां लेकर ‘‘सनातन धर्म पर आघात नहीं सहेगा हिन्दुस्तान’’ लिखे बैनर तले एकत्र हुए। यहां से इन लोगों ने शांति मार्च निकाला। रोड जामकर भारत माता की जय के नारे लगाये।

प्रदर्शन का नेतृत्व करुणा सेवा समिति के संजय शुक्ला ने किया। उन्होंने कहा कि भगवान अयप्पा के पूजन के लिए 41 दिनों की ‘‘बृथम परम्परा’’ का विधान है। इसे किसी धर्म-जाति का व्यक्ति, जिसे भगवान अयप्पा में आस्था हो कर सकता है। हिन्दू धर्म मातृशक्ति का सम्मान करता है। यहां की परम्परा को लिंगभेद करार देना गलत है।

डा. रुचिन अग्रवाल ने कहा सनातन धर्म के खिलाफ सोची समझी रणनीति के तहत आघात किये जा रहे हैं। यह देश और समाज के लिए घातक है।

डॉ. विमल भारद्वाज ने कहा कि हिन्दू धर्म के लोग बसुधैव कुटुम्बकम का पालन करते हैं। यहां कोई भेदभाव जाति, धर्म या लिंग के आधार पर नहीं किया जाता। यह हिन्दू धर्म को बदनाम करने की साजिश है। उन्होंने कहा कि किसी संस्था चाहे मंदिर हो या चर्च या मस्जिद या फिर गुरुद्वारा, सभी में पूजा-इबादत के कुछ नियम होते हैं। इसी तरह भगवान अयप्पा के पूजन के भी कुछ नियम हैं जिन्हें हिन्दू दिल से मानते हैं लेकिन हिन्दू विरोधी लगातार हिन्दू समाज को तोड़ने के लिए साजिशें कर रहे हैं, जिसे हम सफल नहीं होने देंगे।

डॉ. प्रमेन्द्र माहेश्वरी ने कहा कि हिन्दू धर्म के खिलाफ यह साजिश वामपंथी और हिन्दू विरोधी कर रहे हैं। हिन्दू समाज किसी भी हालात में अपने धर्म के खिलाफ साजिश को सफल नहीं होने देगा। हम हिन्दू सनातन परम्पराओं को तोड़ने का पुरजोर विरोध करते हैं।

केरल से पढ़ाई कर चुके और दिल्ली में कम्युनिकेशन क्षेत्र से जुड़े गिरीश पाण्डेय ने कहा कि असल में मामला किसी प्रवेश का नहीं बल्कि खाड़ी देशों के इशारे पर मन्दिर की लूट और सनातन धर्म के अपमान की जिद्द का है। ये एक गहरी साजिश है। दिखाया कुछ जा रहा है, षडयंत्र कुछ और है। जानबूझ कर अदालत में कमजोर दलीलें दी गयीं ताकि केस को कमजोर बनाकर हिन्दू विरोधी तत्वों को जीत दिलाई जा सके। खाड़ी देशों से सोशल मीडिया पर मंदिर की भावनाओं के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। गिरीश ने कहा कि मन्दिर की तुलना किसी और स्थान से करना बेमानी है। जैसे विदेश में चर्च में शादी के बाद जोड़ा ापे करता है। लेकिन मन्दिर में इसे वर्जित माना गया है।

इस अवसर पर बड़ी संख्या में महिलाओं , नार्थ ईस्ट प्रदेशों के युवाओं ने भी वामपंथी साजिशों के खिलाफ जमकर गुस्सा व्यक्त किया।

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