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मीसाबंदियों की पेंशन रोकने के मुद्दे पर पीछे हटे कमलनाथ

पूर्व मुख्यमत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस बाबत एक पत्र साझा किया है जिसमें निर्देश दिया गया है कि भौतिक सत्‍यापन के बाद लोकतंत्र सेनानियों व उनके आश्रितों को सम्‍मान निधि राशि के वितरण की कार्यवाही की जाए।

भोपाल। आपातकाल के दौरान जेलों में बंद रहे लोगों यानी मीसाबंदियों की पेंशन बंद करने का मामला हाई कोर्ट में पहुंचने के बाद मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार के तेवर नरम पड़ गए हैं। पूर्व मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि राज्‍य सरकार ने पेंशन बंद करने का अपना निर्णय पलट दिया है। शिवराज ने इस बाबत अपने ट्विटर हैंडल पर एक पत्र भी साझा किया है। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार ने मीसाबंदियों के लिए यह पेंशन योजना शुरू की थी।

शिवराज सिंह चौहान ने मध्‍य प्रदेश के सामान्‍य प्रशासन विभाग मंत्रालय के जिस पत्र को साझा किया है, उसमें निर्देश दिया गया है कि भौतिक सत्‍यापन के बाद लोकतंत्र सेनानियों, उनके आश्रितों को सम्‍मान निधि राशि के वितरण की कार्यवाही की जाए।

गौरतलब है कि लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्‍ट्रीय संयुक्‍त सचिव मदन बाथम ने कमलनाथ सरकार के उस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी जिसमें मीसाबंदियों की पेंशन रोकने का आदेश दिया गया था। याचिका में कहा गया था कि देश में आपातकाल के दौरान जिन लोगों को जेल में रखा गया था उन्‍हें यह राशि दी जाती है। मध्‍यप्र देश में 2,286 परिवार इस सम्‍मान निधि पर आश्रित हैं। विधानसभा चुनाव के बाद नई सरकार ने दुर्भावनापूर्ण रवैया अपनाते हुए इस पर रोक लगा दी है। याचिका में पेंशन को पहले की तरह बहाल करने अनुराध किया गया था।

ज्ञातव्य है कि कुछ कांग्रेसी नेता मीसाबंदियो की पेंशन योजना को फिजूल खर्च बताते रहे हैं। उनके मुताबिक, भाजपा सरकार ने अपने खास लोगों को उपकृत करने के लिए यह योजना शुरू की और इस पर सालाना 75 करोड़ रुपये खर्च हो रहे थे।

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