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भारतीय रिजर्व बैंक ने घटाईं ब्याज दरें

गवर्नर शक्तिकांत दास की अगुवाई में हुई समीक्षा बैठक के बाद केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में 25 आधार अंकों की कटौती करते हुए इसे 6.25 प्रतिशत कर दिया है।

नई दिल्ली। देश में महंगाई में आई कमी और अर्थव्यवस्था में सुस्ती को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बड़ी राहत देते हुए ब्याज दरों में कटौती कर दी है।

गवर्नर शक्तिकांत दास की अगुवाई में गुरुवार को हुई केंद्रीय बैंक की समीक्षा बैठक के बाद आरबीआई ने रेपो रेट में 25 आधार अंकों की कटौती करते हुए इसे 6.25 प्रतिशत कर दिया है। इसके साथ ही बैंक ने अपने मौद्रिक रुख को ”सख्त” से बदलकर ”सामान्य/न्यूट्रल” कर दिया है।

मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) में शामिल छह सदस्यों में से चार ने दरों में कटौती किए जाने का समर्थन किया। नीतिगत रुख में बदलाव को सभी सदस्यों ने मंजूरी दी।

भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2019-20 के लिए 7.4 प्रतिशत जीडीपी का अनुमान लगाया है। बैंक को वित्त वर्ष 2019-20 की पहली छमाही में महंगाई दर के 3.2-3.4 प्रतिशत के बीच रहने की उम्मीद है जबकि तीसरी तिमाही में यह 3.9 फीसद हो सकती है। आरबीआई ने महंगाई के लिए 4 प्रतिशत (+- दो फीसद) का लक्ष्य रखा है। ईंधन की कीमतों में गिरावट से देश की खुदरा महंगाई दर दिसंबर में घटकर 2.19 प्रतिशत हो गई। नवंबर में यह 2.33 प्रतिशत थी। पिछले कुछ महीनों में महंगाई दर आरबीई के तय लक्ष्य से काफी नीचे रही है।

ब्याज दरों को तय करने समय केंद्रीय बैंक खुदरा महंगाई दर को ध्यान में रखता है। ब्याज दरों में कटौती के बाद बैंक ब्याज में कटौती कर सकते हैं जिसका फायदा लोगों को ईएमआई के कम भुगतान के रूप में मिलेगा। पढ़ें

गौरतलब है कि पिछली बैठक में आरबीआई ने अपने ”सख्त” मौद्रिक रुख को जारी रखते हुए ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया था। पिछली बैठक में केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट को 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा था। यह दूसरी बार था, जब आरबीआई ने दरों में कोई बदलाव नहीं किया।

रेपो रेट के साथ रिवर्स रेपो रेट को भी 6.25 प्रतिशथ जबकि मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी दर (एमएसएफ) और बैंक दर को 6.75 फीसद पर बरकरार रखा गया था। पिछली दोनों बैठकें तत्कालीन गवर्नर ऊर्जित पटेल के कार्यकाल में हुई थीं जिनमें ब्याज दरों के मोर्चे पर कोई राहत नहीं दी गई थी।

‘निजी कारणों’ का हवाला देते हुए उर्जित पटेल के तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दिए जाने के बाद नरेंद्र मोदी सरकार ने पूर्व नौकरशाह शक्तिकांत दास को गर्वनर नियुक्त किया था।

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