The Voice of Bareilly since 2010

केंद्र सरकार ने SC में कहा- अंग्रेजों को गिफ्ट किया गया था कोहिनूर

kohinoorनई दिल्ली, 18 अप्रैल। सरकार ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि ब्रिटिश शासकों ने 20 करोड़ डॉलर से अधिक की अनुमानित कीमत वाला 108 कैरेट कोहिनूर हीरा न तो ‘जबरन लिया था’ और ना ही ‘चुराया’ था बल्कि 167 साल पहले पंजाब के तत्कालीन शासकों ने यह हीरा ईस्ट इंडिया कंपनी को इनाम में दिया था।

शीर्ष अदालत ने कहा कि इस हीरे को वापस लाने के लिए कानूनी उपचार खुला रहना चाहिए। सालिसिटर जनरल रंजीत कुमार ने प्रधान न्यायाधीश टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया, ‘कोहिनूर को जबरन लिया हुआ या चुराया हुआ नहीं कहा जा सकता क्योंकि वर्ष 1849 में महाराजा रंजीत सिंह के उत्तराधिकारियों ने सिख युद्ध में उनकी मदद के लिए ईस्ट इंडिया कंपनी को इनाम के तौर पर दिया था।’

ajmera institute of media studies, bareillyसंस्कृति मंत्री महेश शर्मा ने प्रसिद्ध कोहिनूर हीरे को वापस लाने के लिए उनके मंत्रालय द्वारा किसी कदम से इंकार किया। उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि अगर इस मामले में कोई फैसला करने की बात होगी तो यह राजनयिक स्तर पर होगी। इसके बाद शीर्ष अदालत ने पूछा कि सरकार विश्व में सबसे कीमती हीरों में से एक कोहिनूर पर दावा जताने की इच्छुक है या नहीं। सालिसिटर जनरल ने कहा कि संसद में कई बार कोहिनूर हीरा वापस लाने की मांग उठी है।

 उन्होंने कहा, ‘अगर हम अन्य देशों से कोहिनूर जैसी हमारी कीमती वस्तुओं पर दावा करते हैं तो हर दूसरा देश हम से अपने सामान पर दावा करना शुरू कर देगा। हमारे संग्रहालयों में कुछ नहीं बचेगा।’ उन्होंने कहा कि यह संस्कृति मंत्रालय का रूख है जबकि इस मामले में एक अन्य पक्षकार विदेश मंत्रालय के रूख का अभी इंतजार है।

पीठ ने इसके बाद सालिसिटर जनरल से छह हफ्तों में विस्तृत जवाब सौंपने को कहा। पीठ में प्रधान न्यायाधीश के अलावा न्यायमूर्ति यूयू ललित शामिल थे। अदालत ने कहा, ‘हम जानना चाहेंगे कि क्या सरकार दावा जताना चाहती है? देखिए, हम इस अनुरोध को खारिज करने के इच्छुक नहीं हैं। अगर हम इसे खारिज करते हैं तो वह देश (ब्रिटेन) कह सकता है कि आपके उच्चतम न्यायालय ने अनुरोध खारिज कर दिया और इससे सरकार का कानूनी दावा नामंजूर होने की तरफ बढ सकता है।’

शीर्ष अदालत ने सरकार से ‘आल इंडिया ह्यूमन राइट्स एंड सोशल जस्टिस फ्रंट’ द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर अपना रूख स्पष्ट करने के लिए कहा था। इस याचिका में कोहिनूर हीरा देश में वापस लाने की मांग की गई थी।

कोहिनूर बड़ा, रंगहीन हीरा है जो 14वीं सदी की शुरुआत में दक्षिण भारत में मिला था। 108 कैरेट का कोहिनूर हीरा उपनिवेश युग में ब्रिटिश हाथों में आया था। इतिहास में इस पर मालिकाना हक को लेकर विवाद रहा है और भारत सहित कम से कम चार देशों ने इस हीरे पर अपना दावा जताया है।

error: Content is protected !!