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केन्या में मिला सबसे छोटे बंदर का जीवाश्म, 40 लाख साल पायी जाती थी बंदरों की यह प्रजाति

वाशिंगटन। केन्या और अमेरिका के शोधकर्ताओं के एक संयुक्त दल ने केन्या के पूर्वी क्षेत्र कानापोई में दुनिया के सबसे छोटे बंदर के जीवाश्म का पता लगाया है। इसका आकार जंगली खरगोश के जैसा है। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि दलदले आवासों में रहने के कारण ये बौने हो गए होंगे। माना जा रहा है कि केन्या में लगभग 40 लाख साल पहले इन बंदरों की प्रजातियां वास करती होंगी।

केन्या के राष्ट्रीय संग्रहालय और अमेरिका की अराकंसास यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के अनुसार नैनोपिथेकस ब्राउनी नाम के इन बंदरों का आकार आधुनिक तालपोइन बंदरों जैसा ही रहा होगा, जो विश्व में बंदरों की सबसे छोटी जीवित प्रजाति में से एक है। इसका वजन महज दो से तीन पाउंड ही होता है।

शोधकर्ताओं ने कहा कि “तालपोइन” गुयोन नामक बंदरों के समूह का ही हिस्सा हैं। ये बंदर अफ्रीकी देशों में सर्वाधिक पाए जाते हैं। “ह्यूमन इवोल्यूशन” नामक पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन रिपोर्ट में बताया गया है कि बंदरों की अधिकतर प्रजातियों का आकार नैनोपिथेकस ब्राउनी से कई गुना बड़ा होता है जो विश्व के अलग-अलग हिस्सों में पाये जाते हैं। तालपोइन केवल पश्चिम मध्य अफ्रीका में रहते हैं और उष्णकटिबंधीय जंगलों तक सीमित हैं।

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