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सोने के आभूषणों पर हॉलमार्किंग 1 जून से अनिवार्य, जानिए ग्राहकों को क्या होगा लाभ

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सोने के आभूषणों की हॉलमार्किंग (Gold Hallmarking) अनिवार्य रूप से लागू करने की समय सीमा यदि इस बार आगे नहीं बढ़ाई तो आभूषणों में शुद्धता के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी पर आगामी 1 जून से लगाम लग सकती है। हालांकि सोने की शुद्धता की गारंटी मिलने के साथ ही ग्राहकों को इस बात की भी चिंता है कि कहीं इससे आभूषण महंगे तो नहीं हो जाएंगे। दूसरी ओर कारोबारी परेशान हैं कि हर स्तर पर हॉलमार्किंग की अनिवार्यता न केवल उनके काम के बोझ को बढ़ाएगी बल्कि कागजी खानापूर्ति भी बहुत अधिक बढ़ जाएगी। 

कारोबारियों को हॉलमार्क रजिस्ट्रेशन फीस टर्नओवर के हिसाब देनी होगी। यह फीस टर्नओवर के आधार पर 7500 से 80 हजार रुपये तक है। सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, सोने के आभूषण या इससे बने किसी अन्य सामान आइटम पर हॉलमार्क के लिए 35 रुपये (टैक्स अतिरिक्त) शुल्क है। लेकिन, ज्यादा आभूषणों की शुद्धता के लिए न्यूनतम 200 रुपये औऱ टैक्स लगेगा। इससे सोने की कीमत ज्यादा नहीं बढ़ेगी।

हॉलमार्किंग दरअसल सोने की शुद्धता का पैमाना है। 1 जून के बाद आभूषणों पर अनिवार्य तौर पर लिखना होगा कि यह कितना कैरेट का है। इससे ग्राहकों के लिए सोने के आभूषणों को कहीं भी आसानी से खरीदना औरबेचना आसान होगा। साथ ही चोरी के गहने बेचना और खरीदना आसान नहीं होगा।

1 जून 2021 से सोने के आभूषण, मूर्ति आदि 14, 18 और 22 कैरेट में ही बिकेंगे। हालांकि ज्वेलर्स की मांग है कि 20 कैरेट के गहनों को भी इजाजत दी जाए। ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स से लाइसेंस प्राप्त आभूषण में इस्तेमाल किए गए सोने की शुद्धता का प्रमाणपत्र देंगी। जाहिर है कि ऐसा होने पर ग्राहकों को घटिया या कम गुणवत्ता के सोने की आभूषण बेचकर धोखा नहीं दिया जा सकेगा। सोने की शुद्धता की गारंटी होने से आभूषणों की बिक्री भी बढ़ेगी और सर्राफों की साख मजबूत होगी।

आभूषणों पर होंगी ये 4 पहचान

आभूषणों पर बीआईएस (BIS) मार्क,  2. कैरेट एवं फाइननेस, हॉलमार्किंग सेंटर का नंबर तथा ज्वेलर्स का आइंडेंटिफिकेशन नंबर अंकित होंगे।

बीआईएस मार्क : बीआईएस मार्क या लोगो (BIS Lab) बताएगा कि ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स से लाइसेंस प्राप्त लैब ने गहने की शुद्धता प्रमाणित की है।  

सोने की शुद्धता कैरेट और फाइननेस : सोने की शुद्धता कैरेट और फाइननेस दोनों से आंकी जाती है। 14, 18 और 22 कैरेट के साथ प्रति हजार के अनुपात में फाइननेस गहनों पर लिखी होगी। जैसे 22 कैरेट के लिए 22K और फाइननेस के लिए 916 यानी 22K 916, 18 Karat के लिए 18K750 और 14Karat के लिए 14K585.

सबसे शुद्ध सोना 24 कैरेट (Gold 24 Carat) का होता है लेकिन इतना शुद्ध सोना लचीला होने के कारण आभूषण नहीं बन सकते, लिहाजा इसमें चांदी, जिंक आदि मिलाए जाते हैं।

हॉलमार्किंग सेंटर का मार्क या नंबर : आभूषण पर सोने की शुद्धता परखने वाले हॉलमार्किंग सेंटर का आइंडेंटिफिकेशन नंबर भी होगा। बीआईएस की वेबसाइट से पता लगाया जा सकता है कि संबंधित लैब मान्यता प्राप्त है या नहीं।

ज्वेलर्स की पहचान : आभूषण पर आभूषण विक्रेता के आइंडेंटिफिकेशन नंबर से पता चलेगा कि ये सर्टिफाइड ज्वेलर या मैन्युफैक्चरर है या नहीं।

बीआईएस लैब में किसी आभूषण की शुद्धता आंकने या हॉलमार्किंग में 6 से 8 घंटे लग सकते हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सोने की छड़ें और पर हॉलमार्किंग नहीं होगी। 2 ग्राम से कम वजन के आभूषणों के लिए भी हॉलमार्किंग प्रमाणपत्र आवश्यक नहीं होगा।

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