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चौदह बरिस रामु बनबासी, झिलमिल हो गयीं सब अंखियां जब राम को मिला वनवास

Bareillylive : श्रीरामलीला सभा ब्रह्मपुरी के तत्वावधान में चल रही 165 वीं रामलीला में कल भगवान राम सीता के विवाह, रानी कैकई दशरथ संबाद, कैकई भरत संबाद तथा श्रीराम के वनवास जाने की लीला का मंचन किया गया। गुरु व्यास मुनेश्वर जी महाराज ने लीला की कथा के विषय में बताते हुए वर्णन किया कि दशरथजी के साथ अन्य सभी राज्यकर्मी व प्रजाजनों को साथ ले जनकपुर पहुंचे और उनकी उपस्थिति में तीनों भाईयों तथा श्रीराम व माता सीता का विवाह मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को संपन्न हुआ। इसके पश्चात राजा दशरथ सबको साथ ले अयोध्या लौट आये। जब राम और सभी भाईयों के विवाह का शुभ अवसर बीत गया तो राजा दशरथ अपने ज्येष्ठ पुत्र राम को राजगद्दी सौंपने की तैयारी करने लगे, पूरी प्रजा और परिवार हर्षोल्लास से भर गए। राजा दशरथ की दूसरी रानी कैकई की एक दासी थी मंथरा। राम के राज्याभिषेक की बात सुन मन में कुछ अलग विचार बना के मंथरा ने रानी कैकेयी को यह बात कही कि तुम्हारे सुखों का अंत होने वाला है। महाराज दशरथ ने कल सुबह राम का राज्याभिषेक करने का निर्णय लिया है। यदि राम राजा बने तो भरत उनके दास हो जाएंगे और उन्हें स्वयं कौशल्या की दासी बनना पड़ेगा। मंथरा ने कैकेयी से कहा कि यदि वह राजा दशरथ से मिले दो वर आज मांग ले तो यह समस्या समाप्त हो सकती है। वह दो वर थे राम को 14 वर्ष का वनवास व भरत को अयोध्या का राजा बनाना। रानी कैकेयी को मंथरा का यह सुझाव पसंद आया व उन्होंने ऐसा ही किया। मंथरा की बातों में आकर रानी कैकई ने सारे वस्त्र-आभूषण त्याग कर मलिन वस्त् धारण कर लिया और कोप भवन में जाकर बैठ गईं।

जब राजा दशरथ उनसे मिलने पहुंचे तब कैकई ने उनसे कहा, सुनहु प्रानप्रिय भावत जी का। देहु एक बर भरतहि टीका॥ मागउँ दूसर बर कर जोरी। चौदह बरिस रामु बनबासी॥

राजा दशरथ ये सुनकर चकित रह गए और उन्होंने रानी को समझाने की बहुत कोशिश की। बहुत भरे मन से उन्होंने रामकी वन जाने की अनुमति दी, सभी माताओं से भी आज्ञा ले राम भाई लक्ष्मण और सीता जी के साथ वनवास को प्रस्थान करते हैं, उधर जब भरत अपनी ननिहाल से लौटते हैं और उनको ये सब ज्ञात होता है तो वो कैकई से बहुत वादविवाद करते हैं। कहते हैं कैसा राजतिलक कौन सा सिहासनमृत काया भला कब करती शासन !यह तिलक नही कंलक तूने लगाया है शर्म न आयी, कैसा मातधर्म निभाया है।

प्रवक्ता विशाल मेहरोत्रा ने बताया कि आज निषाद गंगा घाट (नाव) की शोभायात्रा पूरे क्षेत्र में निकाली जायेगी तथा केवट संवाद की लीला का मंचन साहूकारा में तुलसी गली में होगा। अध्यक्ष राजू मिश्रा ने कहा कि होली के अवसर पर निकली राम बारात को भव्य बनाने में कमेटी के सभी पदाधिकारियों व तमाम रामभक्तों का सहयोग रहा, सबका आभार। प्रभु श्रीराम की कृपा सब पर बनी रहे। रामलीला के प्रारम्भ में कवियित्री एवं रिटायर्ड टीचर केंद्रीय विद्यालय जाट सेंटर डॉ मिथिलेश राकेश ने स्वरुपों की आरती उतार कर आशीर्वाद लिया।

पदाधिकारियों में संरक्षक सर्वेश रस्तोगी, क्रूरमाँअंचल नगर पार्षद नरेंद्र सिंह धामी, महामंत्री सुनील रस्तोगी व दिनेश दद्दा, कोषाध्यक्ष राज कुमार गुप्ता, लीला प्रभारी अखिलेश अग्रवाल व विवेक शर्मा, सत्येंद्र पांडेय, नीरज रस्तोगी, बॉबी रस्तोगी, दीपेन्द्र वर्मा, अमित वर्मा, लवलीन कपूर, कमल टण्डन, महिवाल रस्तोगी, सोनू पाठक, बंटी रस्तोगी, धीरज दीक्षित, उत्कर्ष रस्तोगी आदि मौजूद रहे।

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