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आत्ममंथन में अपने भाई को याद कर मानसी ने खून देकर बचाई एक सैनिक की जान

Bareillylive : एसआरएमएस रिद्धिमा के प्रेक्षागृह में रविवार (25 मई 2025) शाम उमा भटनागर द्वारा लिखित कहानी और डा. प्रभाकर गुप्ता और अश्वनी द्वारा नाट्य रूपांतरित नाटक ‘आत्ममंथन ‘ का मंचन हुआ। विनायक श्रीवास्तव निर्देशित इस नाटक एक छोटे परिवार जिसमें पति- पत्नी और उनके दो बालिग बच्चे मानव और मानसी हैं, पर केंद्रित रहा। नाटक में मानव सैन्य अधिकारी बनना चाहता है, लेकिन एक दुर्घटना में उसकी मृत्यु हो जाती है, घटना के सदमें से उसके पिता को हार्ट अटैक होता है और वह भी मर जाते हैं। घर में मानसी और उसकी मम्मी अकेले रह जाते हैं। पुत्र और पति वियोग में मानसी की मम्मी ब्रेन ट्यूमर की शिकार हो जाती हैं। भावनात्मक रूप से अपने भाई मानव से जुड़े होने से मानसी भी तनाव में रहती है। उसे मानव सपने में हमेशा दिखता है और उसे अपनी जान बचाने के लिए बुलाता रहता है। मानसी सपने की बात अपनी मम्मी को नहीं बताती। पिता और भाई के निधन के बाद पूरे घर की जिम्मेदारी मानसी पर आ जाती है। मजबूरन मानसी दिल्ली की किसी कंपनी में नौकरी करने लगती है। वो अपनी मम्मी को उसकी दवाइयों को कब कैसे खाना है समझा कर स्टेशन जाती है। ट्रेन लेट होने से वह वेटिंग रूम पहुंचती है जहां अखबार में किसी सैनिक को बी निगेटिव ग्रुप के खून की जरूरत की खबर पढ़ती है। मानसी का ब्लड ग्रुप भी बी निगेटिव है, लेकिन सैनिक बनने की तैयारी के दौरान मानव की मौत की वजह से मानसी सैनिकों से नफरत करती है। मानसी का अक्स उसे समझाने का प्रयास करता है और वो उस सैनिक को खून देकर उसकी जान बचाती है। डॉक्टर से मानसी को पता चलता है कि वो सैनिक लेफ्टिनेंट है और उसका नाम मानव है। मानसी को लगता है कि उसने अपने भाई कि जान बचाई है। नाटक यहीं पर खत्म होता है। नाटक में मानसी का किरदार मेघा सक्सेना ने निभाया, जबकि डॉ. सुषमा सिंह ने मां और विनायक श्रीवास्तव ने पिता की भूमिका निभाई।

नाटक में गौरव कार्की (मानव), सौरभ रस्तोगी (रवि), अनमोल मिश्रा (कविता), गौरिका शर्मा (सोनी), दिव्यांश शर्मा (सेंकी) ने भी अपनी भूमिकाओं में बेहतरीन अभिनय किया। नाटक में सूत्रधार की जिम्मेदारी संजय सक्सेना ने निभाई। प्रकाश संचालन जसवंत सिंह और साउंड का संचालन किया जाफर का रहा। संगीत संचालन की जिम्मेदारी सूर्यप्रकाश ने निभाई। अनुग्रह सिंह (कीबोर्ड), सूर्यकान्त चौधरी (वायलिन), सूरज पांडेय (बांसुरी) ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस अवसर पर एसआरएमएस ट्रस्ट के संस्थापक व चेयरमैन देव मूर्ति जी, आदित्य मूर्ति जी, आशा मूर्ति जी, ऋचा मूर्ति जी, सुभाष मेहरा, डा.एमएस बुटोला, डा.प्रभाकर गुप्ता, डा.अनुज कुमार, डा.शैलेश सक्सेना मौजूद रहे।

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