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श्री राधा संकीर्तन मंडल ट्रस्ट द्वारा भागवत कथा के प्रथम दिन निकली भव्य कलश यात्रा

Bareillylive : श्री राधा संकीर्तन मंडल ट्रस्ट रजिस्टर्ड बरेली द्वारा 17 दिसंबर मंगलवार से आरम्भ होने जा रही विशाल श्रीमद् भागवत कथा एवं विशाल ज्ञान यज्ञ समारोह के उपलक्ष्य में आज प्रातः 11:00 बजे एक भव्य कलश यात्रा श्री बाँके बिहारी मंदिर राजेंद्र नगर से प्रारंभ हुई जो शील चौराहा, राम जानकी मंदिर, धर्मकांटा से कथा स्थल पर समापन हुआ। कलश यात्रा मे सबसे आगे गणेश जी, शिव परिवार, राम दरबार, जगन्नाथ पूरी से आये जगन्नाथ जी का विग्रह, इसकॉन का संकीर्तन मंडल, बिहारी जी की झांकी, श्री राधा संकीर्तन मण्डल का संकीर्तन मंडल जिसमे शिव चावला, राजू गुलाटी, विवेक अग्रवाल, रंजीत, विनोस अरोरा, राकेश ने भजन गाये। सबसे पीछे युगल सरकार का रथ रहा।

सांयकाल मे कृष्ण कथा स्थल श्री त्रिवटी नाथ मंदिर बरेली में विशाल श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। श्रीधाम वृन्दावन से पधारे “छोटी छोटी गैंया छोटे छोटे ग्वाल” जैसे प्रसिद्ध स्वरचित भजनों को अपनी मधुर आवाज देने वाले कथा व्यास भागवत रत्न आचार्य श्री मृदुल कृष्ण गोस्वामी जी महाराज के श्रीमुख से कथा रस और मधुर भजनों को सुनकर श्रोतागण झूम उठे और मंत्रमुग्ध होकर नृत्य करने लगे। उन्होंने बताया कि यह उनकी बरेली नगर में 14वीं कथा है। महाराज जी ने कहा कि बरेली नगर को तो मेरे श्री बिहारी जी महाराज ने वर लिया है। संपूर्ण बरेली नगर आज से वृंदावन धाम बन गया है।

श्रीमद्भागवत कथा के महत्व को बताते हुए उन्होंने कहा कि ‘भागवत’ शब्द में ‘भ’ शब्द भवसागर रूपी जीवन में हमें प्रकाश देता है। ‘ग’ शब्द जीवन में हमें गति प्रदान करता है। ‘व’ शब्द यह बताता है कि श्रीमद्भागवत सभी पुराणों में वरिष्ठतम है एवं ‘त’ शब्द यह बताता है कि जो भागवत की शरण में आता है वह संसार से तर जाता है। श्रीमद्भागवत और श्रीमद् गीता के अंतर की व्याख्या करते हुए उन्होंने बताया कि दोनों में बहुत अंतर है। श्री मद्भागवत स्वयं साक्षात् श्रीकृष्ण भगवान हैं तथा श्रीमद् गीता भगवान श्री कृष्ण के श्रीमुख से निकली हुई उनकी वाणी है।

श्रीमद् गीता योग शास्त्र है, रामायण प्रयोग शास्त्र है तथा श्रीमद् भागवत वियोग शास्त्र है। जिसने संसार में जन्म लिया है, उसकी मृत्यु निश्चित है। परंतु श्रीमद् भागवत कथा के श्रृवण मात्र से प्राणी इस संसार रूपी भवसागर से तर जाता है और संसार में आवागमन अर्थात जन्म मृत्यु के बंधन से मुक्त हो जाता है। भागवत ऐसा ग्रंथ है जिसमें रस ही रस है, इसमें कहीं भी गुठली का तो नामोनिशान ही नहीं है। उन्होंने कहा कि श्री बिहारी जी महाराज को केवल दो चीजें अच्छी लगती हैं – एक तो उनको चंदन और दूसरा वंदन। जो भी भगवान को को चंदन और वंदन प्रदान करते हैं उनके जीवन के समस्त बंधन कट जाते हैं।

महाराज जी ने श्याम तेरी बंसी बजने लगी, श्याम तेरी बांसुरी ने ऐसा जादू किया आदि भजनों से सभी भक्तों को झूमा दिया। कथा में अध्यक्ष हरीश अग्रवाल कथा यजमान राजीव अग्रवाल- एकता अग्रवाल, संजीव अग्रवाल- श्वेता अग्रवाल, राहुल गर्गया -ऋतू अग्रवाल, महेश अग्रवाल- सीमा अग्रवाल, निशांत अग्रवाल -वान्या अग्रवाल, प्रशांत अग्रवाल – दीपांति अग्रवाल, एवं भारी संख्या में नाथ नगरी वासी उपस्थित रहे। मीडिया प्रभारी रिशुल अग्रवाल ने बताया कल मृदुल कृष्ण गोस्वामी जी महाराज व्यास पीठ से कथा सभी बरेली वासिओ को श्रवण कराएंगे।

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