The Voice of Bareilly since 2010

वाराणसी में ‘भरत मिलाप’ : कमल नयन के दर्शन को उमड़ते हैं लाखों ‘नयन’

वाराणसी, ‘भरत मिलाप’, कमल नयन ,वाराणसी में ‘भरत मिलाप’,घट घट में व्याप्त राम ह,विश्व प्रसिद्द भरत मिलाप,नाटी इमली,बनारस, मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम,
वाराणसी : हर साल बनारस उस पल का साक्षी बनता है जिस पल में श्री राम के नयन भी भीग गए थें। वो पल होता श्री राम का भाई भरत से मिलाप । धर्म नगरी वाराणसी में पिछले 475 साल से भरत-मिलाप होता आ रहा है जिसमे हर वर्ष कमल नयन के दर्शन को लाखों नयन वाराणसी के नाटीइमली के मैदान उमड़ पड़ते हैं। जहाँ श्री राम, लक्ष्मण ,भरत , और शत्रुघन के मिलन की अनुपम छवि लोग हर हर महादेव के उद्घोष के साथ निहारती है ।

अस्ताचलगामीसूर्यकीकिरणोंमेंहोतीहै_लीला

शाम को लगभग चार बजकर चालीस मिनट पर जब अस्ताचलगामी सूर्य की किरणे भरत मिलाप मैदान के एक निश्चित स्थान पर पड़ती हैं तब लगभग पांच मिनट के लिए माहौल थम सा जाता है। एक तरफ भरत और शत्रुघ्न अपने भाईयों के स्वागत के लिए जमीन पर लेट जाते है तो दूसरी तरफ राम और लक्षमण वनवास ख़त्म करके उनकी और दौड़ पड़ते हैं। चारो भाईयों के मिलन के बाद जय जयकार शुरू हो जाती है। फिर चारो भाई रथ पर सवार होते हैं और यदुवंशी समुदाय के लोग उनके रथ को उठाकर चारो और घुमाते हैं। इस लीला को देखने के लिए क्या बच्चा क्या बुजुर्ग सबके मन में केवल एक ही श्रद्धा भगवान के दर्शन की होती है। सनातन संस्कृति को नजदीक से देखने के लिये भारत के कोने कोने से तो लोग आते हैं। लीला को देखने देश-विदेश से भी लोग आते हैं।

     चित्रकूट रामलीला समिति के महामंत्री ने बताया कि , भरत ने संकलप लिया था, ”यदि आज मुझे सूर्यास्त के पहले श्रीराम के दर्शन नहीं हुए तो प्राण त्याग दूंगा।” इसीलिए यह लीला सूर्यास्त के पहले 4:40 पर होती है। इसके बाद यदुवंशी लोग अपने कंधों पर ‘भगवन रथ’ लेकर जाते हैं।
error: Content is protected !!