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Karwa Chauth Vrat History: कैसे हुई करवा चौथ व्रत की शुरुआत,जरूर सुने ब्रह्मा जी की ये कहानी

Karwa Chauth Vrat History and Katha– सुहागिन महिलाएं अगले महीने 1 नवंबर बुधवार को करवा चौथ का उपवास रखेंगी यह व्रत महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और उनके खुशहाल जीवन के लिए रखती हैं। पंचांग के मुताबिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि का आरंभ मंगलवार को रात 9 बजकर 30 मिनट से होगा और 1 नवंबर बुधवार को रात 9 बजकर 19 मिनट पर इसका समापन हो जाएगा। उदया तिथि के अनुसार ये व्रत 1 नवंबर बुधवार को रखा जाएगा।

करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाएं इस व्रत को बड़े ही श्रद्धा-भाव से पूरा करती हैं।पति की लंबी आयु के लिए रखा जाने वाला यह व्रत बेहद खास माना जाता है धार्मिक मान्यताओं के अनुसार करवाचौथ का व्रत सबसे पहले देवताओं की पत्नियों ने रखा था प्राचीन कथाओं और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार करवा चौथ का व्रत देवताओं के समय से चली आ रही है। कहा जाता है एक बार दानवों और देवताओं के बीच युद्ध शुरू हो गया इस युद्ध में देवताओं की हार होने लगी ऐसे में देवताओं ने ब्रह्मा जी के पास जाकर इस संकट से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना करने लगे।

ब्रह्मा जी ने देवताओं की पत्नियों को अपने अपने पतियों के लिए व्रत रखने और युद्ध में उनकी विजय के लिए प्रार्थना करने को कहा साथ ही उन्होंने वचन दिया कि यह व्रत रखने से निश्चित रूप से देवताओं की जीत होगी। देवताओं की पत्नियों ने ब्रह्मा जी की यह बात खुसी खुसी मान ली और देवताओं की पत्नियों ने ब्रह्मा जी के कहे अनुसार कार्तिक माह की चतुर्थी के दिन व्रत रखकर अपने पतियों की जीत की पार्थना करने लगीं जिसने युद्ध में देवतागण विजयी हुए।

जिसके बाद देवताओं की पत्नियों ने चंद्रोदय के समय भोजन कर अपना उपवास पूरा किया। माना जाता है तब से करवा चौथ व्रत की परंपरा शुरू हुई और महिलाएं अपने पतियों की लंबी आयु के लिए यह व्रत रखने लगी

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