Bareillylive : बरेली के प्राचीनतम एवं भव्यतम बाबा त्रिवटी नाथ मंदिर में कल वृंदावन से आए हुए भागवताचार्य पंडित सुरेश शास्त्री का मंदिर कमेटी के प्रताप चंद्र सेठ तथा मीडिया प्रभारी संजीव औतार अग्रवाल ने माल्यार्पण कर स्वागत एवं अभिनंदन किया। प्रथम दिन श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ करते हुए पं.सुरेश शास्त्री ने मंगलाचरण करते हुए कहा कि भगवान सच्चिदानंद स्वरूप है। सच्चिदानंद का अभिप्राय है कि परमपिता परमात्मा जिनका सत चित एवं प्रकाश स्वरूप है, इनका स्मरण करने मात्र से व्यक्ति के तीनों प्रकार के पापों का शमन हो जाता है। कथा व्यास कहते हैं कि तीन प्रकार के पाप होते हैं दैहिक, दैविक और भौतिक इसलिए उन पापों को दूर करने के लिए श्री राधा कृष्ण का ध्यान किया। श्रीमद् भागवत को वेद वृक्ष का पका हुआ फल बताया जोकि रस से परीपूर्ण फल है इसमें त्याग के लिए कुछ भी नहीं है अर्थात सब पावन ही पावन है। श्रीमद् भागवत कथा के मनन मात्र से व्यक्ति विशेष के सभी पापों से मुक्ति मिल सकती है। जिस प्रकार शेर की गर्जना से जंगल में उपस्थित सभी पशु पक्षी डर के भाग जाते हैं तथा जिस तरह श्री गंगा जी में स्नान करने से सभी पाप कर्मों से मुक्ति मिल जाती है उसी तरह मात्र श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण मानव को दुर्गुण से सगुण के पथ पर लाकर कल्याण की ओर अग्रसर करती है।
मुख्य बात है कि मनुष्य को अपना भाव परमात्मा के प्रति निश्चल तथा सत्यता के साथ समर्पित रखना होता है। कथा व्यास ने बताया कि पुराणों की कथा के लिए सर्वोत्तम भूमि नैमिषारण्य में सूत जी व्यास पीठासीन होकर के भागवत की महिमा बताते हुए कहते हैं जिसने भागवत कथा श्रवण की उसे गंगा स्नान के बराबर पुण्य एवं तुलसी सेवा का फल तीर्थ वास के बराबर पुण्य सहज में प्राप्त होता है। कथा व्यास कहते हैं कि भागवत कथा श्रवण मात्र से महापाप करने वाले पापी एवं मर कर के प्रेत योनि को प्राप्त करने वाले जीव भी मुक्त हो जाते हैं। उदाहरण में धुंधकारी एवं गोकर्ण का उपाख्यान सुनाया जोकि ब्राह्मण आत्मदेव और धुंधली के जुड़वां पुत्र थे। धुंधकारी अनैतिक कार्य में लिप्त रहते थे जबकि गोकर्ण भगवत सुमिरन और वेद पुराण के पठन पाठन में अपना ध्यान ईश्वर के प्रति लगाते थे।
कथा व्यास कहते हैं कि सभी प्रकार के अनैतिक कार्यों में अपना जीवन व्यतीत करने के बाद दुष्ट स्वभाव के धुंधकारी को प्रेतयोनि में अति कष्ट सहने पर उनके भाई गोकर्ण द्वारा उनको श्री मद्भागवत कथा के श्रवण से उसका भी उद्धार सम्भव हो जाता है और धुंधकारी को प्रेतयोनी से मुक्ति मिल जाती है। कथा व्यास कहते हैं कि ब्रहमा जी के अनुसार सभी प्रकार के विध्न तथा पाप कर्मों से सद्गति पाने के लिये भगवान का ही वास्तविक स्वरूप श्री मद्भागवत महापुराण है। कथा के उपरांत काफी संख्या में उपस्थित भक्तों ने श्रीमद्भागवत पुराण की आरती की तथा प्रसाद वितरण हुआ। मंदिर कमेटी के मीडिया प्रभारी संजीव औतार अग्रवाल ने बताया कि यह कथा रविवार दिनांक 29 जून से 5 जुलाई शनिवार तक सांयकाल 4 से 7 बजे तक अनवरत चलेगी।मीडिया प्रभारी ने सावन से पूर्व होने वाली अमृतमयी श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कर लाभ लेने का आवाहन किया है। आज की कथा में मंदिर कमेटी के सुभाष मेहरा, ब्रिजेश मिश्रा का मुख्य सहयोग रहा।






