हिंदू धर्म में मां शीतला की पूजा का विशेष महत्व है। यह देवी संक्रामक रोगों, महामारी और त्वचा संबंधी बीमारियों से रक्षा करती हैं। चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को शीतला अष्टमी (बसोड़ा या बासोड़ा पूजन) के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष 2026 में यह पर्व 11 मार्च, बुधवार को पड़ रहा है।
बसोड़ा पूजन की खासियत इस त्योहार की सबसे खास बात बसोड़ा (बासी भोजन) है। पूजा से एक दिन पहले यानी 10 मार्च (शीतला सप्तमी) को ही भोजन तैयार किया जाता है। इसमें रोटी, दाल, चावल, सब्जी आदि बनाकर ठंडा रखा जाता है। 11 मार्च को अग्नि (चूल्हा) नहीं जलाया जाता और बसोड़े का भोग लगाकर प्रसाद वितरित किया जाता है। ऐसा करने से गर्मी के मौसम में ठंडक और स्वास्थ्य की प्राप्ति मानी जाती है।
पूजा का शुभ मुहूर्त: प्रातः 06:36 बजे से शाम 06:27 बजे तक (लगभग 11 घंटे 51 मिनट) इस दौरान भक्त मां शीतला की विधिवत पूजा-अर्चना कर सकते हैं। कई स्थानों पर ब्रह्म मुहूर्त या सुबह जल्दी पूजा करने की परंपरा है।
पूजा विधि :
- सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- मां शीतला की मूर्ति या चित्र को ठंडे पानी से स्नान कराएं।
- बसोड़ा भोजन (बासी प्रसाद) चढ़ाएं – इसमें ठंडी रोटी, दाल, चावल, गुड़ आदि शामिल होते हैं।
- मां को ठंडे पानी, दही, लस्सी या शीतल पेय अर्पित करें।
- आरती करें और मां से परिवार की रक्षा, स्वास्थ्य और रोग मुक्ति की प्रार्थना करें।
- व्रत रखकर बसोड़ा ग्रहण करें।
धार्मिक महत्व मां शीतला को रोग नाशिनी और शीतलता प्रदान करने वाली देवी माना जाता है। होली के बाद आने वाला यह पर्व गर्मियों की शुरुआत में स्वास्थ्य संरक्षण का संदेश देता है। उत्तर भारत, खासकर राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में यह उत्साह से मनाया जाता है।
भक्तों से अपील है कि इस शुभ अवसर पर मां शीतला की कृपा प्राप्त करने के लिए बसोड़ा पूजन अवश्य करें और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहें।








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