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श्रीमदभागवत ज्ञान वैराग्य की पूर्ति कराने वाला महाग्रंथ : आचार्य अतुल कृष्ण शास्त्री

BareillyLive : श्री हरि मन्दिर मॉडल टाउन बरेली में चल रहे 63 वें श्री राधा अष्टमी वर्षिकोत्सव के तृतीय दिवस विराट भक्ति सत्संग में पठानकोट से पधारे कथा व्यास श्री अतुल कृष्ण शास्त्री जी ने कथा में अपने उद्दगार व्यक्त करतें हुए कहा कि श्रीमद भागवत गीता विशुद भक्ति का पथ है, जहां प्राणी का भगवान के श्री चरणों में अन्नय अनुराग समर्पित हो जाता है। श्रीमदभागवत गीता भक्ति के साथ ज्ञान वैराग्य की पूर्ति कराने वाला महाग्रंथ है। भागवत का अभिप्राय जो भगवान के बन चुके है, जिन भक्तो ने भगवान से हमे प्रेम करना सिखाया है उसे भागवत कहा जाता है।

भगवत भूषण श्री अतुल कृष्ण शास्त्री जी ने अपने उद्दागार व्यक्त करतें हुए कहा कि प्रभु का सहारा ही सबसे प्यारा है। अधिकार प्रेम में होता है भक्त का भगवान से, भगवान का भक्त जब पूर्ण भाव से स्वयं को भगवान को समर्पण कर देता है। भगवान को अपना सहारा बना लेता है तो फिर आनंद की अनुभूती करता है। “लगन तुम से लगा बैठे जो होगा देखा जायेगा ,” भक्त भगवान को समर्पण कर निश्चित हो जाता है। मुख्य यजमान अंकित, अनुज अग्रवाल रहे। श्री हरी मन्दिर प्रबंध समिति सचिव रवि छाबड़ा ने बताया कि वर्षिकोत्सव 23 सितंबर तक चलेगा। आज की कथा में मंदिर अध्यक्ष सतीश खट्टर, सुशील हरमिलापी, सचिव रवि छाबड़ा, संजय आनंद, गोविन्द तनेजा, योगेश ग्रोवर, अनिल चढ़ा, रंजन कुमार, जतिन दुआ, दीपक साहनी, मनोज लुनियाल, संजीव कुमार, राजेश अरोरा, विनोद भाटिया तथा महिला मंडल अध्यक्ष श्रीमती रेनू छाबड़ा, कंचन अरोरा, नेहा आनंद, नीलम लुनियाल, सीमा तनेजा, निशा, विमला सोंधी आदि का विशेष सहयोग रहा।

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