Bareillylive : राजेन्द्र नगर स्थित श्री बांके बिहारी मंदिर में चल रही श्रीमदभागवत कथा का द्वितीय दिवस बड़े श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। व्यासपीठ से पूज्य स्वामी रजनीशानन्द जी महाराज ने भक्तों को अनेक दिव्य प्रसंगों का रसपान कराया, जिनमें विशेष रूप से नारद चरित्र, माता कुंती चरित्र और भक्त ध्रुव चरित्र प्रमुख रहे।
कथा के प्रारंभ में स्वामी जी ने कहा कि इस घोर कलियुग में जब मनुष्य भटकाव की ओर अग्रसर हो रहा है, तब भगवान की कथा ही वह दुर्लभ साधन है जो मन, बुद्धि और चित्त को शुद्ध कर सकता है। उन्होंने श्रोताओं को बताया कि अनादि जन्मों के पापों का क्षय भगवान की कथा श्रवण से ही संभव होता है और यही मानव जीवन की सबसे बड़ी पूँजी भी है।
ध्रुव चरित्र का वर्णन सुनाते हुए स्वामी जी ने कहा कि जीवन में गुरु और सत्संग का महत्व सर्वोपरि है। यदि ध्रुव बालक को गुरु की कृपा प्राप्त न होती, तो मात्र पाँच वर्ष की आयु में उनके लिए परमात्मा का साक्षात्कार करना संभव नहीं था। गुरु की कृपा और बालक ध्रुव की दृढ़ साधना से पाँच महीने के भीतर ही भगवान नारायण प्रकट होकर उन्हें दर्शन देने आए। इस प्रसंग ने उपस्थित भक्तजनों को अत्यंत प्रभावित किया और मंदिर परिसर भक्तिरस से सराबोर हो उठा।
इसके पश्चात माता कुंती का चरित्र सुनाते हुए स्वामी जी ने बताया कि विपरीत परिस्थितियों में भी कुंती माता ने सदैव भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण किया और उनकी भक्ति में अडिग रहीं। दुःख और संकट में उन्होंने भगवान को पुकारा, और यह सिखाया कि सुख-सुविधा में नहीं बल्कि संकट में भी ईश्वर को न भूलना ही सच्ची भक्ति है। यह प्रसंग सुनकर कई श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए और उनके नेत्रों से अश्रुधारा बह निकली।
कथा के दौरान स्वामी जी ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि भागवत कथा का पठन और श्रवण केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह समाज और परिवार के लिए भी एक महान मार्गदर्शन है। कथा व्यक्ति के जीवन में शांति, संतोष और संस्कारों का संचार करती है। उन्होंने भक्तों से आह्वान किया कि वे प्रतिदिन थोड़ी देर भी भगवान की कथा का श्रवण करें तो जीवन के अंधकारमय रास्ते भी प्रकाशित हो जाते हैं।
कथा स्थल पर भक्ति गीतों और स्तुति गान से वातावरण गूंजायमान रहा। श्रोता मंडली समय-समय पर “हरे कृष्ण, जय श्रीराम” और “राधे-राधे” के उद्घोष कर रही थी। कथास्थल पर सुसज्जित फूलों की सजावट, दीपों की ज्योति और भक्तों की उपस्थिति ने वातावरण को और भी पवित्र बना दिया।
इस पुण्य अवसर पर कथा आयोजन में विनोद ग्रोवर, दिनेश तनेजा, दीपक भाटिया, अश्विनी अरोरा, होशियार सिंह, विजय बंसल, नितिन भाटिया आदि का प्रमुख सहयोग रहा। उन्होंने पूरे श्रद्धाभाव से सेवा में योगदान देकर आयोजन को सफल बनाया।
कथा के अंत में स्वामी रजनीशानन्द जी महाराज ने भक्तों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण केवल पुस्तक नहीं, बल्कि जीवित दिव्य ज्ञान और भक्ति का स्रोत है। इसके नियमित श्रवण और मनन से जीवन में ईश्वर के प्रति प्रेम, सत्य और करुणा के भाव प्रकट होते हैं।







