Bareillylive : नाथ नगरी परिक्रमा सेवा समिति (रजि.) द्वारा आयोजित नाथ नगरी पैदल परिक्रमा गुरुवार, 31 जुलाई 2025 को श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक सहभागिता के अद्भुत संगम के रूप में आयोजित की गई। यह परिक्रमा साल-दर-साल बरेली की आध्यात्मिक विरासत तथा नाथ संप्रदाय की सांस्कृतिक पहचान को सहेजते हुए भक्तों की आस्था को साकार करती है। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, युवाओं, महिलाओं और भक्त समुदाय के समर्पण से यह आयोजन भव्यता के साथ संपन्न हुआ।
इस पावन यात्रा की शुरुआत बरेली के प्रतिष्ठित त्रिवटीनाथ मंदिर से जलाभिषेक के साथ हुई। संस्था के उपाध्यक्ष विक्रम रस्तोगी ने जानकारी देते हुए बताया कि परिक्रमा की परंपरा के अनुसार इस वर्ष भी बाबा त्रिवटीनाथ की पूजा-अर्चना और जलाभिषेक के पश्चात श्रद्धालु पैदल यात्रा के लिए निकले। यात्रा क्रमशः बाबा वंखंडीनाथ, बाबा पशुपतिनाथ, बाबा धोपेश्वरनाथ, बाबा तापेश्वरनाथ, बाबा मदीनाथ होते हुए बाबा अलखनाथ मंदिर पर समाप्त हुई, जहाँ महाआरती और भव्य प्रसाद वितरण के साथ परिक्रमा का समापन किया गया।
पूरे मार्ग में भक्तों ने “ॐ नमः शिवाय”, “हर-हर महादेव” और “जय भोलेनाथ” के जयघोषों से वातावरण को गूंजा दिया। रास्ते भर भक्ति और उल्लास का जो दृश्य बना, वह देखने योग्य था। मार्ग में बागेश्वरधाम सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से संबंधित काँवर झाँकी प्रदर्शन आकर्षण का केंद्र रही और भक्तों के बीच विशेष चर्चा का विषय बनी रही।
श्रद्धालुओं की सेवा हेतु व्यवस्था भी अत्यंत प्रशंसनीय रही।पशुपतिनाथ मंदिर परिसर में ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन और क्लेअरिंग एजेंट संगठन द्वारा विशेष चाय और नाश्ते की सेवा आयोजित की गई। साथ ही, रास्ते भर पीने के लिए शीतल जल की व्यवस्था भी रवि प्रकाश ग्रोवर द्वारा की गई, जिससे यात्रा आसान और सुगम बनी रही। धोपेश्वरनाथ मंदिर पर श्रद्धालुओं के लिए भोजन भंडारे का आयोजन नाथ नगरी परिक्रमा सेवा समिति द्वारा किया गया।
यात्रा में कुछ प्रमुख सामाजिक और धार्मिक कार्यकर्ता सक्रिय रूप से सम्मिलित रहे, जिनमें सचिन देवल, देवेश गुप्ता, राजकुमार चोपड़ा, तीरथराम मूलचंदानी, हरिशंकर गंगवार, दीपक आनंद, शुभम शुक्ला, अमित देवल, मोनू रस्तोगी, सुरेंद्र मौर्य, राजन पाठक और तरुण अग्रवाल मुख्य रूप से शामिल रहे। उन्होंने यात्रा की गरिमा को बढ़ाया और पूरे आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके साथ-साथ महिलाओं की भी उत्साहजनक भागीदारी रही, जिन्होंने पारंपरिक वेशभूषा में पूरे श्रद्धा भाव से पैदल यात्रा पूरी की।
नाथ नगरी पैदल परिक्रमा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि नाथ परंपरा की जीवंत धारा, सामूहिक चेतना और सामाजिक एकता का प्रतीक बन चुकी है। समिति के सभी कार्यकर्ताओं और बरेलीवासियों के सहयोग से यह आयोजन सफलतापूर्वक पूर्ण हुआ, जो आने वाले वर्षों के लिए एक प्रेरणास्रोत के रूप में स्थापित रहेगा।






