Bareillylive : आधुनिकता और डिजिटल इंडिया के इस दौर में भी अगर जनता को सरकारी सेवाओं के लिए घंटों कतार में खड़ा रहना पड़े, तो यह न केवल व्यवस्थागत खामी को उजागर करता है बल्कि जिम्मेदार कर्मचारियों की लापरवाही पर भी गहरे सवाल खड़े करता है। ऐसा ही एक ताजगी से भरा मगर परेशान करने वाला वाकया मंगलवार को बरेली सिटी पोस्ट ऑफिस में देखने को मिला, जहां कार्यरत पोस्ट मास्टर सुश्री सुधा शर्मा की कार्यशैली और गैरजिम्मेदाराना रवैये ने दर्जनों ग्राहकों को भारी असुविधा में डाल दिया।
घटना का समय और विवरण
यह घटना दोपहर 2:30 बजे से करीब 3:30 बजे के बीच की है जब पोस्ट ऑफिस के मुख्य काउंटर पर बड़ी संख्या में लोग अपने पार्सल, स्पीड पोस्ट, रजिस्टर्ड लेटर और अन्य डाक सेवाओं के लिए कतार में खड़े थे। इन सभी का उद्देश्य मात्र इतना था कि वे अपने जरूरी प्रेषणों को समय पर भेज सकें। लेकिन जैसे ही पोस्ट मास्टर मैडम कार्यालय में आईं, उन्होंने सीधे मुख्य काउंटर पर न आकर, पीछे की खिड़की से कुछ चुनिंदा पार्सल स्वीकार किए और फिर बहाना बनाते हुए कहा कि “आईटी 2.0 सॉफ़्टवेयर में अपडेट चल रहा है,” अतः वे मुख्य काउंटर से अन्य कोई सेवा नहीं कर पाएंगी।
यह सुनकर उपस्थिति जनता में असंतोष व्याप्त हो गया। लोग काफी देर तक शांतिपूर्ण ढंग से इंतजार करते रहे, लेकिन जब परिस्थिति में कोई बदलाव नहीं आया, तब धैर्य का बाँध टूटने लगा।
प्रत्यक्षदर्शियों की आपबीती
भूद के निवासी प्रवीण सक्सेना और रबड़ी टोला के मोहम्मद वसीम, जो उस समय मुख्य काउंटर की लाइन में खड़े थे, ने बताया कि पोस्ट मास्टर को शायद आईटी 2.0 सॉफ़्टवेयर के संचालन की पूरी जानकारी नहीं थी, जिससे कार्य धीमा पड़ गया। दोनों ने यह भी कहा कि खराब प्रशिक्षण और जिम्मेदारी के अभाव के चलते ऐसी समस्याएं आम होती जा रही हैं।
प्रवीण सक्सेना ने बताया, “मैंने ऑफिस से आधे दिन की छुट्टी लेकर जरूरी डाक भेजने का मन बनाया था, ताकि समय पर काम हो सके, लेकिन डेढ़ घंटे लाइन में खड़े होकर भी कोई समाधान नहीं निकला। यह आम व्यक्ति की उपेक्षा है।”
वहीं मोहम्मद वसीम ने कहा, “सरकार तकनीकी उन्नयन की बातें करती है, लेकिन जब इस तकनीक को चलाने वालों को ही जानकारी न हो, तो आम जनता को ही हर्ज भुगतना पड़ता है।”
शिकायत की गई बड़े अधिकारियों से
जागरूक नागरिक एवं स्थानीय निवासी विपिन सोलंकी (निवासी-शांति नगर, गिर्धरपुर रोड, बरेली) ने इस घटना को लेकर मुख्य डाक अधीक्षक को ऑनलाइन और लिखित शिकायत भेजी है। उन्होंने पोस्ट मास्टर सुधा शर्मा के कार्य व्यवहार की जांच की मांग की है तथा यह सुनिश्चित करने को कहा है कि भविष्य में कोई भी कर्मचारी तकनीकी बहाने बनाकर जनता को परेशान न कर सके।
विपिन सोलंकी कहते हैं, “हम सरकार से पारदर्शी व्यवस्था की अपेक्षा रखते हैं। अगर अधिकारी ही काम में रुचि नहीं लेंगे और जनता की समस्याओं को नजरअंदाज करेंगे, तो यह भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में आता है।”
तकनीकी खामी या प्रशासनिक लापरवाही?
इस पूरे प्रकरण में यह कहना मुश्किल है कि वास्तव में तकनीकी दिक्कत थी या फिर यह एक प्रशासनिक बहाना था जिससे कर्मी अपनी जिम्मेदारी से बच सकें। आईटी 2.0 सॉफ्टवेयर हाल ही में कई डाकघरों में लागू किया गया है, परंतु बिना समुचित प्रशिक्षण के यदि इस सॉफ़्टवेयर को लागू किया जाता है, तो उसका सीधा नुकसान नागरिकों को ही झेलना पड़ता है।
इससे पूर्व भी कुछ अन्य डाकघरों में इस तरह की समस्याएं सामने आ चुकी हैं, जहाँ कर्मचारियों को नए सिस्टम के साथ काम करने में कठिनाई हुई। लेकिन सवाल यह उठता है कि जब तक कर्मचारियों को पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं मिल जाता, तब तक व्यवस्था को आम जनता पर क्यों थोपा जाता है?
भविष्य के लिए सबक और मांगें
इस घटना ने सरकार और पोस्टल विभाग दोनों के लिए यह स्पष्ट संकेत दिए हैं कि प्रशासन और तकनीक का संतुलन बनाए बिना सेवा वितरण नहीं हो सकता। आम जनता अब जागरूक हो रही है और सोशल मीडिया, शिकायत पोर्टल आदि के माध्यम से ऐसी लापरवाहियों को उजागर कर रही है।
ग्राहकों की मांग है कि –
- पोस्ट ऑफिस कर्मियों को नए सॉफ्टवेयर पर पूर्ण प्रशिक्षण दिया जाए।
- मुख्य काउंटर हमेशा सक्रिय रखा जाए, ताकि लाइन में खड़े लोगों की सुनवाई हो सके।
- जिम्मेदार अधिकारियों की नियमित समीक्षा की जाए।
- पारदर्शिता हेतु सीसीटीवी फुटेज और ग्राहक प्रतिक्रियाओं को आधार बनाकर मूल्यांकन प्रणाली तैयार हो।





