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प्राचीन शीतला माता मंदिर में गुरु पूर्णिमा पर भंडारे का आयोजन, भक्तों ने लिया आशीर्वाद

Bareillylive : गुरु पूर्णिमा का पर्व भारतीय संस्कृति में गुरु के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और सम्मान का पर्व माना जाता है। इस पावन अवसर पर रामपुर गार्डन स्थित प्राचीन शीतला माता मंदिर में एक भव्य और विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्र के सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक था, बल्कि समाज में सेवा, सहयोग और सौहार्द की मिसाल भी बना।

मंदिर परिसर में श्रद्धा का माहौल

गुरु पूर्णिमा के शुभ दिन प्राचीन शीतला माता मंदिर का परिसर भक्तों से खचाखच भरा हुआ था। मंदिर के मुख्य पुजारी श्री यज्ञदेव देव शर्मा जी ने प्रातःकाल विधिवत पूजा-अर्चना कर भगवान का आशीर्वाद लिया और माता शीतला का विशेष पूजन किया। इसके पश्चात भगवान का प्रसाद सभी भक्तों में वितरित किया गया। प्रसाद वितरण के दौरान भक्तों के चेहरों पर आस्था और संतोष की झलक साफ दिखाई दे रही थी।

समाजसेवियों और स्थानीय निवासियों का सहयोग

इस भव्य आयोजन की सफलता में रामपुर गार्डन के सभी निवासियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। प्रमुख समाजसेवी सुबोध आर्य, प्रतिष्ठित व्यवसायी विकास गुप्ता, वरुण सूरी, विवेक खंडेलवाल, जुगनू शर्मा, विपिन शर्मा, नितिन शर्मा, ध्रुव चतुर्वेदी, अंशुल मिश्रा आदि ने अपने-अपने स्तर पर विशेष सहयोग प्रदान किया।इनके साथ-साथ अन्य स्थानीय निवासियों ने भी तन-मन-धन से इस आयोजन को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई। मुख्य अतिथि के तौर पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव सूरज यादव शामिल रहे।

शीतला माता मंदिर का ऐतिहासिक महत्व

रामपुर गार्डन का यह प्राचीन शीतला माता मंदिर लगभग 1960 के आसपास निर्मित हुआ था। इसका निर्माण स्वर्गीय ओमवती शर्मा जी के प्रयासों से संभव हो सका था। मंदिर के संबंध में मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूर्ण होती है। श्रद्धालु मानते हैं कि माता शीतला के दरबार में जो भी सच्चे हृदय से प्रार्थना करता है, उसका मन शीतल हो जाता है और उसके भीतर का द्वेष, कपट, घृणा, क्रोध जैसी बुराइयां स्वतः ही दूर हो जाती हैं। इसी कारण इस मंदिर को ‘शीतला माता मंदिर’ कहा जाता है। यहां आने वाले श्रद्धालु कहते हैं कि चाहे मन कितना भी अशांत हो, माता के चरणों में आते ही मन को अद्भुत शांति और शीतलता प्राप्त होती है।

मंदिर का हालिया जीर्णोद्धार

पिछले वर्ष ही इस मंदिर का जीर्णोद्धार पंडित योगेश पंडित जी के नेतृत्व में समाज के सहयोग से कराया गया। जीर्णोद्धार के बाद मंदिर की भव्यता और श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। मंदिर समिति द्वारा जेठ माह में शीतल पेय वितरण, समय-समय पर प्रसाद वितरण और भंडारे का आयोजन किया जाता है, जिससे समाज में सेवा और सहयोग की भावना सुदृढ़ होती है।

भंडारे में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित भंडारे में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। भंडारे में शुद्ध और सात्विक भोजन के साथ-साथ शीतल पेय भी वितरित किए गए। भक्तों ने माता शीतला के दर्शन कर प्रसाद ग्रहण किया और अपने जीवन में सुख-शांति की कामना की। आयोजन के दौरान मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन और धार्मिक गीतों की गूंज से वातावरण भक्तिमय बना रहा।

सेवा और समर्पण की मिसाल

इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें समाज के सभी वर्गों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। किसी ने भोजन बनाने में सहयोग किया, तो किसी ने प्रसाद वितरण में। कई लोगों ने आर्थिक सहयोग दिया, तो कई ने श्रमदान कर आयोजन को सफल बनाया। इस प्रकार यह भंडारा सेवा, समर्पण और सामाजिक एकता का प्रतीक बन गया।

श्रद्धालुओं की मनोकामना पूर्ति

मंदिर समिति के अनुसार, यहां आने वाले अनेक भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण हुई हैं। कई श्रद्धालु बताते हैं कि माता शीतला के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई प्रार्थना अवश्य पूरी होती है। यही कारण है कि मंदिर में समय-समय पर भंडारे, प्रसाद वितरण और अन्य सेवा कार्य होते रहते हैं, जिसमें भक्तजन अपनी श्रद्धा और कृतज्ञता प्रकट करते हैं।

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