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खतरनाक पटरी पर दौड़ी ‘प्रभु की रेल’

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बरेली, 25फरवरी। वैसे तो सड़को पर वाहनों का रास्ता भटकना पाया जाता है लेकिन अगर रेल रास्ता भटकर जाये तो आप साच सकते है कि क्या हो सकता है। यह काई कहानी नहीं एक हकीकत है जो कि एक रेल के साथ हुआ। यह पहली बार हुआ कि बरेली में ‘प्रभु’ की रेल रास्ता भटक गई। काठगोदाम जाने के बजाय रामपुर की तरफ जाने वाले ट्रैक पर चल पड़ी। चालक को तब होश आया, जब यात्री चिल्ला पड़े, वरना हादसा तय था।

 सुबह करीब दस बजे बरेली जंक्शन पर काठगोदाम एक्सप्रेस को रोका गया था। थोड़ी देर बाद उसे सिटी स्टेशन होते हुए काठगोदाम के लिए जाना था। जैसे ही ट्रेन चली तब गेट के पास खड़े और खिड़की वाली साइड में बैठे यात्रियों के होश उड़ गए। गाड़ी काठगोदाम की बजाय रामपुर ट्रैक पर दौड़ रही थी।जिसे देखकर सभी यात्री चिल्लाने लगे, कुछ दूरी पर बना क्रॉसिंग खुला था वहां से गुजर रहे लोगों ने बमुश्किल भागकर अपनी जान बचाई। यात्रियों की चीख पुकार सुनकर आसपास बस्ती के लोग भी घरों से बाहर आ गए। चीख-पुकार सुनकर लोको पायलट को सुध आई और उसने ब्रेक लगाए। तब लोगों की जान में जान आई। जिसके बाद कई यात्री ट्रेन से उतकर बस से अपनी मंजिल की ओर रवाना हुए।
ajmera BL 2016-17
 सुबह 11:26 बजे जंक्शन पर त्रिवेणी एक्सप्रेस बेपटरी होने के कारण लखनऊ से काठगोदाम जाने वाली 15043 काठगोदाम एक्सप्रेस बुधवार दोपहर जंक्शन पर रोकी गई थी। जंक्शन वाया बरेली सिटी, बहेड़ी – काठगोदाम जाने वाली ट्रेन त्रिवेणी एक्सप्रेस के लाइन छह एवं एक से हटने के बाद दोपहर 2:15 पर चलाई गई। काठगोदाम एक्सप्रेस के लोको पायलट ने ट्रेन वाया बरेली सिटी ले जाने के बजाय रामपुर ट्रैक पर दौड़ा दी। रामपुर ट्रैक पर कोई सिग्नल नहीं था, इसलिए श्मशान भूमि क्रॉसिंग भी खुली थी। जहां से राहगीर गुजर रहे थे। जिसके चलते यात्रियों को भी ट्रेन गलत ट्रैक पर चलने का आभास हो गया। यात्रियों ने शोर मचाना शुरू कर दिया। इससे लोको पायलट की नींद टूटी। जिसके बाद लोको पायलट ने स्टेशन मास्टर से बात कर ट्रेन को रोका।
जब काठगोदाम एक्सप्रेस अचानक रामपुर वाले ट्रैक पर दौड रही थी। उस समय रामपुर या लखनऊ की ओर से कोई ट्रेन अपने सही ट्रैक पर नहीं आ रही थी। यदि ऐसा होता तो बडा़ हादसा हो जाता। इतनी बडी गलती हेने के बाद भी कोई गलती मानने को तैयार नहीं था।कोच बेपटरी होने के बाद कैरिज एंड वैगन और ट्रैफिक विभागों के बीच एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने लगे। मुरादाबाद रेल मंडल के अफसरों की मौजदगी में ही बरेली जंक्शन के अफसर भिड़ गए। इसके चलते संयुक्त रिपोर्ट नहीं बन सकी। जबकि हादसे के दो घंटे अंदर ज्वाइंट रिपोर्ट बन जानी चाहिए।

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