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चर्च पर हमला : शरणार्थी बनकर पहुंचा था फ्रांस, कर दिया ऐसा कांड

पेरिस/नई दिल्ली। दाने-दाने को मोहताज वह युवक दर-दर भटकता हुआ कुछ सप्ताह पहले ही फ्रांस पहुंचा था। जिस देश ने उसे शरण दी, रहने का ठिकाना और भोजन-पानी दिया, उसी देश में इस इस्लामिक चरमपंथी ने ऐसा कांड कर दिया कि आज पूरा यूरोप, अमेरिका और आस्ट्रेलिया समेत करीब डेढ़ सौ देश इस्लामिक चरमपंथियों के खिलाफ खड़े हो गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त कर चुके हैं। यूरोपियन काउंसिल के सदस्यों ने संयुक्त बयान जारी कर फ्रांस में हुई घटना की निंदा की है। साथ ही कहा गया है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में वो फ्रांस के साथ हैं। अमेरिका और आस्ट्रेलिया भी कट्टरपंथ के खिलाफ एकजुटता की बात कही है।

दरअसल, गुरुवार को फ्रांस के नीस शहर स्थित एक चर्च में हमलावर ने चाकू से एक महिला का गला काट दिया और दो अन्य लोगों की निर्मम तरीके से हत्या कर दी। हमलावर ने जब महिला का गला काटा उस वक्त वह अल्लाहू अकबर चिल्ला रहा था। यह हमला जब हुआ, तब चर्च में अच्छी खासी संख्या में लोग प्रार्थना के लिए जुटे थे।

नोट्रे डेम चर्च नीस शहर के सबसे बड़े चर्च में से एक है। इससे पहले भी इलाके में गोलियों की आवाज सुनाई दी थी। नीस शहर के मेयर क्रिश्चियन एस्ट्रोसी ने कहा कि हमलावरों को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि मृतक में से एक चर्च का वॉर्डन है। 

आतंकवाद निरोधक विभाग के अधिकारी जीन फ्रैंकोइस रिचर्ड ने बताया कि गुरुवार को जिस हमलावर ने चाकुओं से हमला किया था वह ट्यूनिशियाई नागरिक था। उसका जन्म 1999 में हुआ था और वह यूरोप सितंबर में आया था। अधिकारियों के मुताबिक, यह शख्स भूमध्य सागर के आइलैंड लैंपेडूसा से चलकर इटली पहुंचा था और इसके बाद फ्रांस आया। अफ्रीका से आनेवाले प्रवासियों के लिए यही मुख्य लैंडिंग प्वाइंट है।  

दरअसल यह गुस्सा राष्ट्रपति मैक्रॉन के विवादित बयान के बाद भड़का था, जिसमें कहा गया था कि इस्लाम एक ऐसा धर्म है जिससे आज पूरी दुनिया में संकट में है। उनके इस बयान के बाद से ट्विटर पर हैशटैग #BoycottFrenchProducts, #BoycottFrance Products, #boycottfrance #boycott_French_products #ProphetMuhammad ट्रेंड करने लगा। इस बयान के बाद से मैक्रॉन मुस्लिम देशों की आलोचना का शिकार हो गए।

यह हमला ऐसे समय में हुआ है, जब शार्ली हेब्दो व्यंग्य पत्रिका के कार्यालय में जनवरी 2015 में हुए नरसंहार के मामले में मुकदमा चल रहा है। इस पत्रिका ने पैगंबर मोहम्मद के कैरिकेचर प्रकाशित किए थे। इससे इस्लामी दुनिया में गुस्से की लहर फैल गई थी। पत्रिका ने सितंबर में इन कार्टूनों को फिर से प्रकाशित किया और पिछले महीने एक युवा पाकिस्तानी व्यक्ति ने पत्रिका के पूर्व कार्यालय के बाहर दो लोगों को घायल कर दिया था। 

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