Bareillylive : श्रावण मास की आखिरी और चतुर्थ सोमवार को जब पूरे बरेली में घनघोर बारिश हो रही थी, रास्ते लबालब पानी से भर गए थे, ऐसे चुनौतीपूर्ण मौसम में भी बरेली सिविल डिफेंस के वार्डन अपनी ड्यूटी पर डटे रहे। चाहे रास्ते फिसलन भरे हों, जलजमाव से लोगों का आना-जाना मुश्किल हो गया हो, या कांवड़ियों की भीड़ बढ़ चुकी हो—इन सब बाधाओं के बावजूद इन वार्डनों की सेवा भावना में कोई कमी नहीं आई। श्रद्धालुओं की सेवा और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना ही उनका उद्देश्य रहा।
सावन के इस पावन अवसर पर बरेली के विभिन्न शिवालयों—जैसे कोतवाली क्षेत्र, सिविल लाइन्स, किला मंदिर, और अन्य प्रमुख मंदिरों—में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। हर कोई भगवान शिव का जलाभिषेक करने आया था। श्रद्धालुओं की सहायता के लिए लगाए गए सिविल डिफेंस वार्डन बारिश में पूरी तरह भीगते हुए, बिना किसी शिकन के, पूरे समर्पण के साथ अपनी सेवाएं देते रहे।
वहीं प्रशासनिक सहयोग की दृष्टि से सिविल डिफेंस के पदाधिकारियों ने भी मोर्चा संभाला और अपने वार्डनों के मनोबल को बनाये रखने के लिए मैदान में साथ उतर आए। उपनियंत्रक राकेश मिश्र, डिप्टी चीफ वार्डन रंजीत वशिष्ठ, सहायक उपनियंत्रक प्रमोद डागर, पंकज कुदेशिया, डिविजनल वार्डन अन्जय कुमार अग्रवाल, आरक्षित डिविजनल वार्डन शिवलेश पाण्डेय, कंवलजीत सिंह (डिप्टी डिविजनल वार्डन, आरक्षित) और स्टाफ ऑफिसर हरीश भल्ला जैसी वरिष्ठ टीम ने वार्डनों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य किया।
यह दृश्य बेहद अनुकरणीय था—बारिश की परवाह किए बिना ये अधिकारी मंदिरों का दौरा करते रहे और स्वयं अपने स्तर पर श्रद्धालुओं के सहयोग व संयोजन में मदद करते रहे। कोई हाथ में छाता लिए भीगते हुए रास्ता दिखा रहा था, कोई ट्रैफिक कंट्रोल कर रहा था तो कोई वृद्धों व महिलाओं की सहायता कर रहा था। यह सभी कार्य बिना किसी भी अपेक्षा के, केवल कर्तव्य भाव से प्रेरित थे।
इस समर्पण और संगठनात्मक कार्यशैली ने यह दर्शाया कि बरेली सिविल डिफेंस केवल आपातकालीन स्थितियों में ही नहीं, बल्कि प्रत्येक धार्मिक और सामाजिक अवसरों पर भी पूरी तत्परता के साथ कार्य करता है। चाहे मौसम कैसा भी क्यों न हो, जब भी ज़रूरत होती है, सिविल डिफेंस का हर सदस्य तत्परता से सेवा देने को तैयार रहता है।
इतनी भारी बारिश में जब आमजन घरों से निकलने को भी तैयार नहीं था, तब इन वार्डनों ने एक मिसाल पेश की कि सच्ची सेवा क्या होती है। उनका यह समर्पण व कार्यकुशलता नागरिकों के लिए सुरक्षा और भरोसे की मजबूत दीवार बन कर उभरी। सिविल डिफेंस के इस प्रयास ने एक बार फिर यह प्रमाणित किया कि जब समाज जिम्मेदार हाथों में होता है, तब हर विपरीत परिस्थिति को भी संयम और दृढ़-निश्चय से पार किया जा सकता है।





