Bareillylive : सावन मास भगवान शिव की आराधना का विशेष पर्व है, और इसी अवसर को ध्यान में रखते हुए ‘कलर्स ऑफ़ डिवाइन एक्सप्रेशंस’ नामक कलाकारों के एक समूह ने इस माह के प्रत्येक सोमवार को भगवान शिव के विभिन्न रूपों और भावनात्मक अभिव्यक्तियों पर आधारित कलाकृतियाँ रचीं। इन कृतियों में शिव के रूप, रुद्र भाव से लेकर शांत और सौम्य स्वरूप तक सब कुछ बारीकी और भक्ति भाव से दर्शाया गया था। आज सावन के अंतिम सोमवार को इस विशेष श्रृंखला का समापन एक आकर्षक कला प्रदर्शनी के माध्यम से हुआ, जो शहर के प्रमुख स्थल डमरू चौराहा पर आयोजित की गई।
प्रदर्शनी के आरंभ में सभी कलाकारों ने शंख और डमरू बजा कर वातावरण को शिवमय बना दिया। ‘हर हर महादेव’, ‘बोल बम’ और ‘ॐ नमः शिवाय’ के जयघोषों ने पूरे स्थान को धर्ममय और आनंदमय ऊर्जा से भर दिया। यह दृश्य न केवल धार्मिक था, बल्कि मानो शिव की उपस्थिति को प्रत्यक्ष रूप में अनुभव कराया हो। इस आयोजन में शहर भर से शिवभक्तों और कला प्रेमियों का तांता लग गया। लोग भगवान शिव की इन सजीव कलाकृतियों को देखकर मंत्रमुग्ध हो उठे।
मुख्य अतिथि पार्थ गौतम ने शिरकत कर कलाकारों के इस प्रयास की मुक्तकंठ से सराहना की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आज की इस प्रदर्शनी में कलाकारों ने न केवल अपनी कला का प्रदर्शन किया, बल्कि उससे भी बढ़कर उन्होंने शिव भक्ति के सुंदर स्वरूप को समाज के सामने उकेरा है। उन्होंने ये भी कहा कि इस तरह की कला विधाएँ जनमानस को आध्यात्म से जोड़ती हैं और भारतीय संस्कृति की अमूल्य परंपराओं को जीवित रखती हैं।
डॉ. आंचल रोशनी, जो इस कार्यक्रम की संयोजक रहीं, उन्होंने बताया कि इस प्रदर्शनी का उद्देश्य केवल चित्रों का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि लोगों के मन में शिव भक्ति की भावना को उत्पन्न करना और उसे प्रबल बनाना था। उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि कला एक ऐसा माध्यम बने जिससे धर्म, संस्कृति और भावनाओं की अभिव्यक्ति हो सके। शिव की भक्ति को रंगों और आकृतियों के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाना ही हमारी असली कोशिश थी।”
प्रदर्शनी में डॉ रागिनी मिश्रा, कपिल, ज्योति रानी, सौरभ, अज़ीम, सुनील, ईशान जैसे कलाकारों की अद्भुत कलाकृतियाँ प्रदर्शित की गईं। हर चित्र में शिव की एक नई अनुभूति थी—कहीं वह अघोरी रूप में थे, कहीं नटराज के रूप में नृत्य करते हुए, तो कहीं माता पार्वती के साथ सौम्य मोहक मुद्रा में। दर्शकों का कहना था कि इन चित्रों को देखने से ऐसा लग रहा था मानो वे जीवित हों और शिव स्वयं उपस्थित हों।
कुछ दर्शकों ने इसे “एक आध्यात्मिक अनुभव” तो कुछ ने “चित्रों में छिपे दर्शन” बताया। एक दर्शक ने कहा, “इन पेंटिंग्स में शिव के साथ आत्मा का सीधा संबंध हो जाता है। आपकी आँखें चाहें जितनी देर एक चित्र पर टिकें, वह उतनी ही गहराई से कुछ कहता है।”
प्रदर्शनी की सफलता ने यह स्पष्ट कर दिया कि लोग न केवल कला में रुचि रखते हैं, बल्कि यदि उसमें आध्यात्मिकता और भक्ति का रंग हो, तो वह हृदय को अधिक छूती है। कलाकारों की यह पहल अपने-आप में प्रेरणादायी रही, जिसने सावन के इस पावन माह में श्रद्धालुओं को शिव से जुड़ने का नया माध्यम दिया। सभी उपस्थितों ने इस बात पर सहमति दी कि इस प्रकार के सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रम नियमित रूप से होते रहने चाहिए ताकि समाज में सकारात्मक ऊर्जा और संस्कृति का प्रवाह बना रहे।





