Bareillylive : उत्तर प्रदेश सरकार ने नाथनगरी बरेली के प्रमुख शिव मंदिरों में जीर्णोद्धार और भव्य कॉरिडोर निर्माण के लिए करोड़ों रुपये की योजनाओं को स्वीकृति दी है। कई शिव मंदिरों पर विकास कार्य भी शुरू हो गए हैं। स्मार्ट सिटी की तरह ही इन योजनाओं का उद्देश्य न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजना है बल्कि श्रद्धालुओं को मूलभूत सुविधाएं देना भी है। इसके अंतर्गत मल्टी पर्पज हॉल, पार्किंग और जनसुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है।
हालांकि, इन योजनाओं में अब तक मंदिरों तक पहुँच के लिए नए वैकल्पिक मार्गों के विकास पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है। वर्तमान स्थिति यह है कि नाथनगरी कॉरिडोर के नाम पर लगभग 32.5 किलोमीटर के पुराने मार्ग को चिन्हित कर उसका केवल सौंदर्यीकरण किया गया है। बोर्ड और डिवाइडर बदले गए, लेकिन वास्तविक लाभ से भक्त और आम नागरिक वंचित रहे। यही कारण है कि इस कॉरिडोर की समीक्षा और पुनर्विचार की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
पत्रकार निर्भय सक्सेना ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मेल भेजकर विशेष तौर पर दो वैकल्पिक मार्गों के निर्माण प्रस्तावित किए हैं। पहला – सुभाषनगर स्थित तपेश्वरनाथ मंदिर को पुराने बीएसए कार्यालय, बीडीए कॉलोनी से जोड़ते हुए सीधे बदायूं रोड तक नया मार्ग बनाया जाए। इस मार्ग के बनने से बरसात में जलभराव और सुभाषनगर के टापू में बदल जाने की समस्या का समाधान होगा, साथ ही भक्तों को भी सुविधा मिलेगी।
दूसरा – चौधरी तालाब स्थित पुराने हार्टमेन रेलवे क्रॉसिंग से रेल लाइन के समानांतर चंपतराय बगिया, अलखनाथ मंदिर होते हुए किला रामपुर रोड रेलवे क्रॉसिंग तक एक वैकल्पिक मार्ग तैयार करना। भविष्य में इसे बाकरगंज होते हुए मढ़ीनाथ मंदिर तक भी विस्तारित किया जा सकता है। यह मार्ग श्रद्धालुओं की यातायात जटिलताओं को दूर कर नाथनगरी योजना को और अधिक प्रासंगिक बनाएगा।
इस संबंध में प्रदेश के वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार, विधायक संजीव अग्रवाल, मंडलायुक्त और बीडीए अधिकारियों को भी मेल व व्हाट्सएप के माध्यम से सुझाव भेजे गए हैं। निर्भय सक्सेना का कहना है कि केवल दिखावटी कॉरिडोर की बजाय यदि इन वास्तविक मार्गों को योजनाओं में सम्मिलित किया जाए तो नाथनगरी योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उस सोच के अनुरूप बन पाएगी, जिसमें कहा गया है – लागत कम, काम दमदार।
बरेली विकास प्राधिकरण की रामायण वाटिका और रुद्रावनम जैसी योजनाओं को भी इसी संकल्पना का हिस्सा मानते हुए आगे बढ़ाया जाना चाहिए। नाथ मंदिरों तक आसान पहुँच ही श्रद्धालुओं के लिए सबसे बड़ा सौंदर्यीकरण है।





