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लॉकडाउन का असरः यूपी बोर्ड के माध्यमिक विद्यालयों में 20 अप्रैल से ई-लर्निंग

लखनऊ। वक्त की नजाकत और जरूरत को देखते हुए उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) अब केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद (सीबीएसई) का राह पर है। दरअसल, कोरोना वायरस संक्रमण की चेन ब्रेक करने के लिए लागू किए गए लॉकडाउन की वजह से छात्र-छात्राओं की पढ़ाई बाधित हो रही है। इसे देखते हुए वह सरकार के निर्देश पर 27 हजार से अधिक माध्यमिक विद्यालयों में पंजीकृत विद्यर्थियों के लिए ई-लर्निंग शुरू करने जा रहा है।

उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने निर्देश दिया है कि प्रदेश के सभी जिलों में एक साथ 20 अप्रैल 2020 से ऑनलाइन पठन-पाठन की व्यवस्था शुरू की जाए। इसके लिए वाट्सएप व वर्चुअल क्लास का सहारा लिया जाएगा। यह भी निर्देश दिया गया है कि कक्षा 8 से प्रोन्नत छात्र-छात्राओं का ऑनलाइन पंजीकरण कक्षा 9 में किया जाए। डिप्टी सीएम के निर्देश के बाद शिक्षा निदेशक माध्यमिक विनय कुमार पांडेय ने इस संबंध में सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को पढ़ाई कराने का निर्देश जारी कर दिया है।

इस तरह शुरू होगी ऑनलाइन पढ़ाई की प्रक्रिया

1. सभी जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) जिले के सभी माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों का वाट्सएप ग्रुप बनाएंगे।

2. प्रधानाचार्य अपने विद्यालय के शिक्षकों का ग्रुप और पाठ्य योजना बनाकर छात्र-छात्राओं को प्रेषित करेंगे।

3. यूपी बोर्ड की वेबसाइट पर उपलब्ध पाठ्य पुस्तकें को डाउनलोड करके सभी विषय अध्यापकों को वाट्सएप ग्रुप पर भेजा जाएगा।

4. दीक्षा पोर्टल से कक्षा 6 से 12वीं तक की ई-बुक एवं वीडियो डाउनलोड कर छात्र-छात्राओं को भेजे जायेंगे।

5. शिक्षक अपने विषय के छात्र-छात्राओं का वाट्सएप ग्रुप बनाएंगे। हर ग्रुप में विद्यालय के प्रधानाचार्य को जरूर रखा जाएगा।

6. विद्यालयकी समय सारिणी तैयार की जाएगी जिसमें अध्यापन के लिए सुबह 9 से शाम 4 बजे तक को डेढ़ से दो घंटे के तीन खंडों में विभाजित करके विषयवार तय किया जाएंगे।

7. विषय शिक्षक वेबसाइट से डाउनलोड ई-पुस्तक, वीडियो आदि छात्र-छात्राओं को एक दिन पूर्व ग्रुप पर भेजेंगे।

8. सभी विद्यालय विषय अध्यापक के लिए समय सारिणी बनाएंगे ताकि वे ऑनलाइन पढ़ाई करा सकें।

9. शिक्षक विषय के लिए आवंटित समय में ऑनलाइन रहने के लिए संदेश भेजेंगे। छात्र-छात्राएं भी वाट्सएप ग्रुप पर ही प्रतिक्रिया देंगे। शिक्षक इसी माध्यम से उनकी समस्याओं का निराकरण करेंगे। इसी पर गृह कार्य दिया जाएगा और विदयार्थी उसे पूरा करके जवाब देंगे। छोटे-छोटे टेस्ट भी लिये जा सकते हैं।

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