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हरि मंदिर में 65वें वर्ष के भक्ति ज्ञान वार्षिक श्री राधा अष्टमी महोत्सव का भव्य समापन

Bareillylive : श्रीहरि मंदिर मॉडल टाउन में आयोजित 65वें भक्ति ज्ञान वार्षिक श्री कृष्ण जन्माष्टमी एवं श्री राधा अष्टमी महोत्सव का भव्य समापन हुआ। समापन अवसर पर पंडित श्री रामदेव शास्त्री ने राधा नाम की महिमा पर सत्संग कर भक्तों को आध्यात्मिक आशीर्वाद दिया। पानीपत से पधारी पूजनीय श्री श्री 108 श्रीमति कांता देवी हरमिलापी महाराज ने अपने अनमोल वचनों से कहा कि प्रभु का सहारा सबसे प्यारा और कल्याणकारी होता है। उन्होंने भक्तों को समझाया कि भगवान के चरणों की अनुभूति से ही जीवन में सुख-दुख का भेद समाप्त हो जाता है। महाराज ने कहा, “भगवान को पाने के लिए राधा रानी के बन जाओ।”

महोत्सव के दौरान ब्रिज की महारानी श्री राधा रानी के जन्मदिन की भव्यता को महसूस करते हुए बरसाने के मंगल गीतों का आयोजन हुआ, जिसमें श्री राधा रानी की कृपा और भगवान के महोत्सव की खुशियां चारों ओर फैलीं। भक्तों ने “आज आज बधाई, वृषभानु घर लाली जमाई है” जैसे भावपूर्ण भजनों के माध्यम से अपने प्रेम का अभिव्यक्त किया।

श्री हरमिलापी महाराज ने मंदिर समिति, सदस्यों और सेवादारों को पुरस्कार और आशीर्वाद देकर उत्साह बढ़ाया। राधा अष्टमी के पावन अवसर पर धार्मिक सेवा समिति द्वारा प्रस्तुत किए गए भजनों ने श्री हरि मंदिर प्रांगण को राधामय बना दिया। भजनों में “बरसाना मोहे प्यारा लागे,” “तेरी बिगड़ी बना देगी चरण रज राधा रानी की,” और “मेरे रोम-रोम में राधे मगन में नाचूंगी” जैसे गीतों ने भक्तों को भावविभोर कर दिया।

महोत्सव के दौरान भक्तों ने मिलकर उत्साह और श्रद्धा से श्री राधा रानी और श्यामा प्यारी के जयकारे लगाए। कार्यक्रम के अंत में मंदिर प्रबंध समिति के सचिव रवि छाबड़ा ने सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सब पर राधा रानी और भगवान कृष्ण की कृपा बनी रहे। इस वार्षिक महोत्सव के समापन पर लगभग 20,000 श्रद्धालुओं ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया।

श्री हरि मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष सुशील अरोड़ा, उपाध्यक्ष अश्वनी ओबेरॉय, सचिव रवि छाबड़ा सहित अन्य पदाधिकारी, सदस्य और महिला सेवा समिति के सक्रिय सहयोग से यह महोत्सव सुचारू और सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। सभी ने मिलकर भगवान राधा-कृष्ण के इस पावन महोत्सव की खुशी मनाई और आने वाले वर्षों में भी इसी प्रकार भक्ति और श्रद्धा के साथ इसे मनाने का संकल्प लिया।

श्रीहरि मंदिर का यह महोत्सव सामाजिक और धार्मिक समरसता का प्रतीक बनकर बरेली के आध्यात्मिक जीवन में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

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