Bareillylive : त्बिलिसी (जॉर्जिया), भारत और जॉर्जिया के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने वाले CDPF (कल्चरल डायलॉग एंड पीस फोरम) के चेयरमैन दारिस्पन पाराशर के विशेष आमंत्रण पर बरेली की प्रसिद्ध लेखिका कविता अरोरा जॉर्जिया के प्रतिष्ठित रूस्तावली नेशनल थिएटर पहुँचीं। मूल रूप से एक जॉर्जियन नाट्य प्रस्तुति के लिए दिया गया यह निमंत्रण जल्द ही भारतीय साहित्य, संस्कृति और जॉर्जियन कला के गहन संवाद का ऐतिहासिक क्षण बन गया।
रूस्तावली नेशनल थिएटर में प्रस्तुत नाटक अपने प्रयोगधर्मी अंदाज के लिए विख्यात रहा। दर्शक और कलाकार एक ही मंच पर सहभागी बने, जबकि लाइव ओपेरा गायन, प्रभावशाली लाइटिंग और साउंड डिजाइन ने पूरे वातावरण को कलात्मक ऊँचाइयों पर पहुँचा दिया। नाट्य प्रस्तुति के ठीक बाद कविता अरोरा की पांचवीं पुस्तक ‘शाम की टपरी’ का अंतरराष्ट्रीय विमोचन हुआ। यह समारोह थिएटर के डायरेक्टर श्री गियोर्गी तेवजाद्जे, मैनेजर लाली तबागारी तथा जॉर्जिया के ख्यातनाम कलाकारों निकोलोज त्सुलुकिद्जे, लेला अरबिद्जे और आना मकात्सारिया द्वारा सामूहिक रूप से संपन्न किया गया।
भारत में प्रकाशित होने के कारण कार्यक्रम के दिन मुद्रित प्रतियाँ उपलब्ध न होने पर आई-पैड पर पुस्तक की छवि प्रदर्शित कर प्रतीकात्मक विमोचन किया गया। यह नवाचारी तरीका जॉर्जियन कलाकारों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना और भारतीय रचनात्मकता का प्रतीक माना गया। विमोचन के दौरान डायरेक्टर गियोर्गी तेवजाद्जे ने ‘शाम की टपरी’ को जॉर्जियन भाषा में अनुवादित कराने की इच्छा जताई। उन्होंने लेखिका को 19 फरवरी को होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम में अतिथि के रूप में आमंत्रित किया तथा भविष्य के अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में सहभागिता का प्रस्ताव भी दिया।
‘शाम की टपरी’ जीवन की उन शामों को शब्दबद्ध करती है, जो आधुनिक तेज रफ्तार दुनिया में पीछे छूट चुकी हैं—मोहल्लों की टपरियाँ, छतों पर गपशप, रिश्तों की गर्माहट और जीवन का अपनत्वपूर्ण ठहराव। यह पुस्तक जनवरी 2026 के वर्ल्ड बुक फेयर में पाठकों से रूबरू हो चुकी है तथा 6-8 फरवरी को जयपुर पिंक फेस्ट में भी साहित्य प्रेमियों के बीच लाई जा रही है।कविता अरोरा की पूर्व पुस्तकें—‘पैबंद की हँसी’ (महिला जीवन के विविध पक्ष), ‘चाँद का शरगा’ (प्रकृति और संवेदना), ‘कागज के नीले साहिल’ (अंतर्मन के भाव) तथा ‘स्याही सने सपने’ (समाज के विभिन्न वर्गों की कहानियाँ)—पहले ही पाठकों व आलोचकों में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं।
यह पूरा आयोजन CDPF चेयरमैन दारिस्पन पाराशर के नेतृत्व में सफल रहा। पाराशर वर्षों से जॉर्जियन सांस्कृतिक समूहों को भारत लाकर कार्यक्रम आयोजित करते रहे हैं, जिसके लिए भारत सरकार ने उन्हें सम्मानित भी किया है। जॉर्जियन कलाकारों का भारत प्रेम इस अवसर पर भावपूर्ण रूप से उभरा। वे भारत के गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस, दिवाली, होली व गरबा जैसे पर्व उत्साहपूर्वक मनाते हैं, जिसमें भारतीय वेशभूषा, संगीत-नृत्य प्रमुख आकर्षण रहते हैं। वे भारत का राष्ट्रीय गान कंठस्थ कर सम्मान के साथ गाते भी हैं।
वर्तमान में कविता अरोरा पिछले ढाई माह से जॉर्जिया प्रवासरत हैं। जल्द ही जॉर्जियन कलाकार भारत यात्रा पर आ रहे हैं, जहाँ वे तिब्बत क्षेत्र, वल्लौरी, भगवान शिव स्थलों पर साधना करेंगे तथा दक्षिण भारत के प्रमुख मंदिरों का भ्रमण करेंगे। यह नाट्य समूह पूर्व में आगरा, मथुरा, वाराणसी, लखनऊ व मुंबई में प्रदर्शन कर चुका है। रूस्तावली नेशनल थिएटर में यह विमोचन भारत-जॉर्जिया के साहित्यिक, सांस्कृतिक व राष्ट्रीय आत्मीयता का जीवंत प्रतीक बन गया।







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