Bareillylive : श्री रानी महालक्ष्मी बाई रामलीला समिति (रजि.) चौधरी मोहल्ला, बरेली के तत्वावधान में चल रहे श्रीरामलीला महोत्सव में रविवार को ऐतिहासिक और भव्य आयोजन देखने को मिला। इस अवसर पर राम बारात की शोभायात्रा का शुभारंभ बरेली के महापौर डॉ. उमेश गौतम ने भगवान श्रीराम की आरती उतारकर किया। इसके बाद पूरे शहर में राम बारात का अद्वितीय और भव्य जुलूस निकाला गया, जिसने श्रद्धालुओं को आध्यात्म और भक्ति के रंग में रमा दिया। शाम को श्रीराम–सीता विवाह तथा विवाह पश्चात जनकपुरी महल में आयोजित ‘श्रीराम का कलेवा’ की लीला का मंचन हुआ। इन अनूठी लीलाओं ने उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं को आस्था और भक्ति की गंगा में सराबोर कर दिया।
राम बारात की भव्य शोभायात्रा
भव्य शोभायात्रा रानी साहब फाटक से प्रारंभ होकर शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से गुजरी। सबसे आगे बैंड बाजे की मधुर धुनें गूंज रही थीं, वहीं पीछे-पीछे सुसज्जित घोड़े, रथ और आकर्षक झांकियाँ शामिल थीं। भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न की जीवंत झाँकियाँ देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। रास्ते में जगह-जगह व्यापारियों, महिलाओं और बच्चों ने पुष्पवर्षा कर बारात का स्वागत किया।
बारात बाबा ब्रह्मदेव मंदिर, गौरीशंकर मंदिर, बजरिया, चाहबाई, काली मंदिर, कोहारपीर चौकी, कुतुबखाना चौराहा, नीम की चढ़ाई, साहूकारा और किला बाजार से होते हुए अलखनाथ मंदिर के सामने से गुजरकर मुरावपुरा पहुँची। इसके बाद पुनः रानी साहब फाटक से होते हुए चौधरी मोहल्ला स्थित रामलीला मैदान पहुँची। पूरे मार्ग में जगह-जगह स्वागत द्वार सजाए गए थे, झालरों और बिजली की जगमगाती झाल-मालाओं से पूरा नगर विवाहोत्सव की छटा बिखेर रहा था।
श्रीराम–सीता विवाह की दिव्य लीला
रामलीला मैदान पहुँचने के बाद भगवान श्रीराम की बारात का जनकपुरी दरबार में विधिवत स्वागत किया गया। फूलों से सजे भव्य मंडप में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विवाह की रस्में संपन्न हुईं। माता सीता ने भगवान श्रीराम के गले में जयमाला पहनाई तो पूरा वातावरण “जय सिया राम” के उद्घोषों से गूंज उठा। इसी अवसर पर भरत–मांडवी, लक्ष्मण–उर्मिला और शत्रुघ्न–श्रुतकीर्ति का विवाह भी मंचित हुआ। मंगलगीत गूंजे, शहनाई बजी और उत्साह व उल्लास का आलम ऐसा रहा कि दर्शकों ने बारंबार जयकारे लगाए। दृश्य इतना दिव्य और भावुक था कि श्रद्धालुओं की आँखें नम हो उठीं।
श्रीराम का कलेवा – संस्कारों की छवि
विवाह उपरांत रामलीला में कलेवा प्रसंग का मंचन किया गया। इसमें पौराणिक परंपरा के अनुसार जनकपुरी महल में पंगत में बैठे सभी बारातियों का राजा जनक और महारानी सुनयना ने सत्कारपूर्वक स्वागत किया। भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के साथ बारातियों को प्रतीकात्मक रूप से विविध व्यंजन परोसे गए। फलों, मिठाइयों और पकवानों से सजी झाँकी ने दर्शकों का मन मोह लिया। इस मंचन ने दर्शाया कि भारतीय संस्कृति की आत्मा आतिथ्य और सत्कार में ही निहित है।
श्रद्धालुओं का उत्साह और समिति की भूमिका
राम बारात की यात्रा से लेकर विवाह और कलेवा तक हर क्षण हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे। महिलाएँ मंगलगीत गाती रहीं, बच्चे छतों से पुष्पवर्षा करते रहे और बुजुर्ग श्रद्धा भरे स्वर में “जय सिया राम” का उद्घोष करते रहे। आयोजन को सफल बनाने में समिति की महत्वपूर्ण भूमिका रही। श्रीरामलीला समिति के अध्यक्ष राम गोपाल मिश्रा ने कहा कि यह आयोजन न केवल धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि समाज के लिए आदर, भक्ति और पारिवारिक संस्कारों का सजीव उदाहरण भी है।
इस अवसर पर समिति के पदाधिकारी पं. रामगोपाल मिश्रा (अध्यक्ष), हरीश शुक्ला (उपाध्यक्ष), घनश्याम मिश्रा, प्रदीप बाजपेयी, नीरज शुक्ला, महामंत्री शिव नारायण दीक्षित, महाप्रबंधक श्रेयांश बाजपेयी, मंत्री धीरेंद्र शुक्ला, मंत्री बृजेश प्रताप सिंह, उपमंत्री आदित्य शुक्ला, मीडिया प्रभारी शशिकांत गौतम, सह प्रभारी विनोद राजपूत, मेला प्रबंधक यश चौधरी, सह मेला प्रबंधक आकाश गंगवार, शिवम वर्मा, प्रतीक अरोड़ा समेत अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
इस बारात, विवाह और कलेवा की अविस्मरणीय प्रस्तुतियों ने न सिर्फ श्रद्धालुओं को आनंदित किया, बल्कि शहर को एक बार फिर से भक्ति, प्रेम और संस्कृति की अद्वितीय विरासत से जोड़ दिया।






