Bareillylive : कृष्णा खंडेलवाल कनक स्मृति साहित्यिक समिति के तत्वावधान में श्रीमती कृष्णा खंडेलवाल कनक जी की पुण्य स्मृति में संस्था मुख्यालय गंगापुर के सभागार में काव्य संध्या एवं विचार गोष्ठी का भावपूर्ण आयोजन किया गया। इस अवसर पर साहित्य प्रेमियों ने दिवंगत साहित्यकार की रचनाओं व व्यक्तित्व को याद कर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी चंद्रकांत त्रिपाठी, संस्थापक अध्यक्ष वीरेंद्र प्रसाद खंडेलवाल, कार्यक्रम संयोजक डॉ. रजनीश सक्सेना, विशिष्ट अतिथियों अशोक त्रिपाठी, पूर्व रोटरी गवर्नर पी पी सिंह, महंत अरविंद कुमार, रो रमेश अग्रवाल, सुरेंद्र बीनू सिन्हा तथा कार्यक्रम अध्यक्ष रमेश गौतम ने मां सरस्वती एवं श्रीमती कृष्णा खंडेलवाल की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्ज्वलन कर की। मां वीणा की वंदना के बाद कवयित्री व वक्ताओं ने अपनी रचनाओं से समां बांध दिया।
कवि रणधीर प्रसाद गौड़ ने भावुक स्वर में कहा, “मुहब्बत में बिछड़ जाने का किसको गम नहीं होता। यह ऐसा दर्द है जो जिंदगी में कम नहीं होता। किसी तस्वीर से माना इलाज़े ग़म नहीं होता। मगर फ़ुरकत में इतना भी सहारा नहीं होता।” कवि राम कुमार भारद्वाज अफरोज ने कृष्ण भक्ति पर आधारित पंक्तियां सुनाईं, “कैसे राधा कृष्ण का तुम देखोगे रास। मन की आंखें ही नहीं अगर तुम्हारे पास।” मनोज दीक्षित टिंकू ने जीवन दर्शन पर कहा, “सफर को अपने जारी रख पूरी हर तैयारी रख। मृत्यु तो एक अटल सत्य हैं दूर प्रभु बीमारी रख।” ठाकुर राम प्रकाश सिंह ओज ने नैतिकता का संदेश दिया, “ईर्ष्या की कटार से कभी न किसी पे वार कर। न किसी पर स्वार्थ की अपनी नुकीली धार धरे। जिंदगी का क्या भरोसा किस घड़ी मिट जाय कब। हो सके बनकर पतंगा रोशनी से प्यार कर।”
कार्यक्रम अध्यक्ष रमेश गौतम ने कहा, “किसी की आंख में आंसू न हो यह ध्यान रखना मन।” कुशल संचालन करते हुए कवि इंद्रदेव त्रिवेदी ने जीवन के सार पर कहा, “ये धरती ये पर्वत गगन एक ही है। ये सूरज ये बादल पवन एक ही है।” मुख्य अतिथि चंद्रकांत त्रिपाठी ने कृष्णा खंडेलवाल जी को साहित्यिक धरातल पर सही मायनों में साहित्य शिरोमणि बताते हुए कहा कि उनका साहित्य अंतर्मन को स्पर्श करने वाला था। वे आज भी हम सभी के बीच उपस्थित हैं तथा युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। साथ ही कहा कि कृष्णा खंडेलवाल जी की स्मृति साहित्य जगत को हमेशा प्रेरित करती रहेगी।
उपस्थित गणमान्य अतिथियों ने अपने विचारों से श्रद्धासुमन अर्पित किए। कार्यक्रम संयोजक डॉ. रजनीश सक्सेना ने कृष्णा जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला। संस्था सचिव गौरव खंडेलवाल ने कविता के माध्यम से उन्हें नमन किया। अंत में संस्थापक अध्यक्ष वीरेंद्र प्रसाद खंडेलवाल ने सभी का आभार व्यक्त किया। यह आयोजन साहित्यिक समर्पण व सांस्कृतिक जागरण का अनुपम उदाहरण बना, जहां सभी साहित्य प्रेमी एकजुट हुए।






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