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साहित्यिक सरिता: बरेली में लेखिका संघ की काव्य गोष्ठी में बिखरे कविताओं के रस रंग

Bareillylive : शहर की प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था “लेखिका संघ” के तत्वावधान में कवियत्री अल्पना नारायण के ग्रीन पार्क स्थित आवास पर भव्य काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस साहित्यिक संध्या की अध्यक्षता लेखिका संघ की संरक्षक डॉ. निर्मला सिंह ने की, जबकि मुख्य अतिथि अनुराग त्यागी और विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार राजेश गौड़ उपस्थित रहे। गोष्ठी की शुरुआत मां वीणा वादिनी की वंदना से हुई, जिससे वातावरण पूरी तरह से साहित्यिक और आध्यात्मिक हो गया।

डॉ. निर्मला सिंह ने अपनी प्रेरणादायक कविता के माध्यम से सबको उत्साहित करते हुए कहा—
“बिन बुलाए लेने आए
तोड़ बंद किवाड़े
जीवन तो है रैन बसेरा
दो दिन नीड़ बरसाना।”

कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन लेखिका संघ की अध्यक्षा दीप्ति पांडे ने किया। उन्होंने अपनी कविता की पंक्तियों में प्रेम व जीवन के भावों को कुछ यूं व्यक्त किया—
“ऐ पवन इश्क की ज़रा धीमी चल,
करती नहीं परहेज, विपरीत ना चल।
मस्त गाती फिरती तू मेरे गीत चल,
लोक-लाज से भी तू भयभीत चल।”

संस्था की सचिव किरण कैथवाल ने अपनी मोहक रचना “मोहब्बत के शहर में बदनाम फिरती हूं,
लेके तेरा नाम सरेआम फिरती हूं” की प्रस्तुति दी, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा। कवित्री मीरा प्रदर्शनी द्वारा प्रस्तुत गणेश स्तुति और उपाध्यक्ष चित्रा जौहरी की भगवान शंकर पर कविता ने आयोजन को भक्तिमय बना दिया।

कवित्री मीना अग्रवाल ने अपनी ग़ज़ल “जब हम होते हैं अकेले तभी लगते हैं यादों के मेले” के माध्यम से एकांत और स्मृतियों का सुंदर चित्रण किया। कवित्री उमा शर्मा ने भी भगवान शंकर की भक्ति में अपनी कविता पढ़ी। साहित्यकार अविनाश अग्रवाल की ग़ज़ल—
“निगाहों के आगोश में जो आप आये
तसव्वुर में हजारों दिये झिलमिलाएँ।”
भी खूब सराही गई।

विशिष्ट अतिथि राजेश गौड़ ने पंक्तियों “जो राख थी वह गई कोई किनारा लिए,
लहरें ही बस गिनता रहा आँखों का खारापन” के माध्यम से गहरे जीवनभाव प्रस्तुत किए। मुख्य अतिथि अनुराग त्यागी ने “मैं न करूंगा शादी” और “दोस्ती” विषयों पर आकर्षक रचनाएँ सुनाईं। आयोजन की मेजबान अल्पना नारायण ने भी जीवनदर्शन पर गहन कविता पाठ किया।

वरिष्ठ शायर हिमांशु श्रोत्रिय ‘निष्पक्ष’ ने अपनी विशेष शैली में कहा—
“रख उसूल ताख पर तहज़ीब जेब में,
उलझा हुआ है आदमी मक्रो फरेब में।”

गोष्ठी का समापन अल्पना नारायण के सभी कवित्रियों व कवियों के प्रति आभार एवं सफल आयोजन की सराहना के साथ हुआ, जिसके बाद सभी ने आयोजन की मुक्तकंठ से प्रशंसा की।

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