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जरूरत है श्रीमती की : हास्य के बीच लालच और झूठ हुआ बेपर्दा

बरेली। एसआरएमएस रिद्धिमा में गुरुवार की शाम राजकुमार अनिल द्वारा लिखित ‘जरूरत है श्रीमती की’ नाटक का मंचन किया गया। हास्य से भरपूर इस नाटक में सीख दी गई है कि लालच और स्वार्थ के लिए बोला गया झूठ एक दिन पकड़ा ही जाता है और सच्चाई सामने आ ही जाती है। पूरे नाटक में कलाकारों के बेहतरीन अभिनय ने दर्शकों को खूब गुदगुदाया।

नाटक का मुख्य पात्र एक चालाक मुनीम है जो अपने सेठ को चूना लगाता रहता है। वह सेठ की संपत्ति को हड़पना चाहता है। उधर सेठ अपनी इकलौती बेटी मंदा का विवाह अपने मित्र दीनानाथ के बेटे मलय कुमार से कराना चाहता है लेकिन सेठ कभी मलय कुमार से मिला नहीं होता है। यह बात मुनीम को पता चल जाती है। एक दिन सेठ किसी काम से बाहर जाता है इसी बीच एक गरीब चित्रकार मुकेश लालची मुनीम से टकरा जाता है। वह मुनीम से कहता है कि उसकी माँ बीमार हैं उसे पैसे की सख्त जरूरत है।

मुकेश की बात सुनते ही मुनीम के लालची दिमाग में ख्याल आता है कि क्यों न इस गरीब चित्रकार को नकली मलय कुमार बनाकर सेठ जी से मिलवा दूं। वह चित्रकार मुकेश को नकली मलय कुमार बनाकर सेठ जी के पास ले जाता है। मुनीम पहले ही मुकेश से कह देता है कि शादी के बाद वह सेठ की आधी दौलत उसके नाम कर देगा। लेकिन, मुनीम इस बात से अंजान होता है कि मुकेश और मंदा पहले से ही एक-दूसरे से प्रेम करते हैं। इसबीच एक कवि मंदा से एकतरफा प्रेम करता है और उससे शादी करना चाहता है। लेकिन इतने में असली मलय कुमार सेठ के यहां पहुंच जाता है जो कि मंदबुद्धि बताया गया है।

अंत में असली मलय कुमार जो कि शुरू से पागल होने का नाटक कर रहा होता है वह असल मे पागल नही होता है। वह अपने पिता सेठ दीनानाथ की मर्जी के खिलाफ सेना में भर्ती हो जाता है।  इसी कारण पागल बनने का नाटक करता है जिससे मंद उसको नापसंद करके चित्रकार मुकेश से विवाह कर ले। सेठ सारी सच्चाई जानने के बाद चित्रकार मुकेश और मंदा की शादी के लिए राजी हो जाता है।

इस प्रकार नाटक के अंत में झूठ की हार हो जाती है और सच्चाई की जीत। नाटक में सेठ जी के नौकर छटंकी ने अपने अभिनय से खूब हंसाया। नाटक का निर्देशन विनायक श्रीवास्तव रिद्धिमा गुरु अम्बुज कुकरेती द्वारा किया गया। इसमें मुनीम का किरदार विनायक श्रीवास्तव ने, मलय कुमार का किरदार गौरव धीरज, मुकेश का किरदार अंशुमन, मंदा का किरदार कीर्ति, सेठ का किरदार राजू चौहान, कवि प्रेमपुरी का किरदार अजय चौहान और नौकर छटंकी का किरदार अंकित पाठक ने बहुत खूबी से निभाया। कलाकरों के अभिनय ने दर्शकों को लोटपोट कर दिया।

सभागार में एसआरएमएस ट्रस्ट के चेयरमैन देवमूर्ति, आशा मूर्ति, आदित्य मूर्ति, ऋचा मूर्ति, सेंटर हेड आशीष कुमार और शहर के संभ्रांत लोग मौजूद रहे।

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