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महेश मधुकर को पांचाल साहित्य शिरोमणि सम्मान, रंगारंग काव्य संध्या में रचनाकारों ने बांधा समा

Bareillylive : साहित्यिक संस्था शब्दांगन के तत्वावधान में श्रीराम मंदिर सभागार, कूंचा डालचंद्र, बिहारीपुर में रंगारंग होली कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. महेश मधुकर को उनकी साहित्यिक उपलब्धियों के लिए ‘पांचाल साहित्य शिरोमणि सम्मान’ से सम्मानित किया गया।

संस्था के अध्यक्ष डॉ. सुरेश रस्तोगी, महामंत्री इंद्रदेव त्रिवेदी, उपाध्यक्ष डॉ. अवनीश यादव एवं रामकुमार अफरोज ने डॉ. मधुकर को उत्तरीय, पगड़ी, मोती की माला, शब्दांगन मेडल तथा सम्मान का प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मानित किया। डॉ. मधुकर ने शब्दांगन परिवार का हार्दिक आभार व्यक्त किया और कहा, “यह सम्मान मेरी साहित्य साधना को नई प्रेरणा देगा। भविष्य में और भी उत्कृष्ट रचनाएं प्रस्तुत करने का संकल्प लेता हूं।” यह सम्मान पांचाल क्षेत्र की साहित्यिक परंपरा को मजबूत करने वाला कदम है, जैसा कि संस्था के पूर्व आयोजनों में भी देखा गया।

होली की रंगीन प्रस्तुतियां

कार्यक्रम का शुभारंभ कवि मनोज दीक्षित टिंकू की वाणी वंदना से हुआ। रचनाकारों ने होली के थीम पर गीत, गजलें, दोहे एवं हास्य रचनाओं से समां बांध दिया।

कवि हिमांशु श्रोत्रिय निष्पक्ष ने कहा-
“होली पर गंभीर न होंगे, मुस्कानों में पीर न होंगे।
रसवंती रसना कहती है, शब्द सुमन शमशीर न होंगे।।”

रामप्रकाश सिंह ओज ने मंगल कामना की-
“घर-घर में रंगोली हो, कोयल जैसी बोली हो।
करता प्रभु से यही विनय, सबकी अच्छी होली हो।।”

कैलाश मिश्र रसिक ने ब्रज होली का चित्रण किया-
“लाल भये होरी के रंग लाल, लाल पकरि लियो पी छू से।
मिल दयो रंग गुलाल।।”

उमेश अद्भुत ने प्रेम रंग की कामना की-
“अद्भुत होली में हो जाये, भस्म दिलों के मैल।
रंग प्रेम का आज विश्व में, चहुं दिशि जाये फैल।।”

हास्य कवि मनोज टिंकू ने ठहाके लगवाए-
“जिस दिल में साली नहीं, होली का क्या काम।
कैसे उसको चैन हो, कैसे हो आराम।।”

डॉ. अवनीश यादव का दोहा- “के सच महुआ मंजरी, रासरंग रसधार। फागुन लेकर आ गया, सारे सब सिंगार।” खूब सराहा गया।

संचालन एवं अन्य रचनाएं

महामंत्री इंद्रदेव त्रिवेदी की गजल ने तालियां बटोरीं-
“होली पर कुछ बवाल मत करना, टेढ़े मेढ़े सवाल मत करना।।
साली आ जाए शांत ही रहना, वीरता का कमाल मत करना।।
जूता आ जाए झुक जरा जाना, उसके सम्मुख कपाल मत करना।।
होली पर खुद हलाल हो जाना, औरों को तुम हलाल मत करना।।”

नवगीतकार रमेश गौतम के दोहे सार्थक रहे-
“रंगी देह को देखकर ऐसा हुआ लगाव।
धूल धूसिरत हो गये सन्यासी सब भाव।
परदेशी की राह में तन मन हुआ उदास।
मेघदूत लिखने लगा मौसम कालीदास।।”

अन्य रचनाकारों- डॉ. महेश मधुकर, उपमेंद्र सक्सेना, रामकुमार अफरोज, विशाल शर्मा, राजकुमार अग्रवाल, जितेंद्र कुमार मिश्रा, संतोष कपूर, डॉ. सुरेश रस्तोगी, संजीव अवस्थी, रणधीर प्रसाद गौड़ धीर, बिंदु सक्सेना, नरेंद्र पाल सिंह, कन्हैया मिश्र ने होली गीतों से आनंद बिताया।

कार्यक्रम का सरस संचालन इंद्रदेव त्रिवेदी ने किया। अध्यक्ष डॉ. सुरेश रस्तोगी ने सभी का आभार व्यक्त कर होली की बधाई दी। यह आयोजन साहित्य प्रेमियों के लिए यादगार रहा, जो शब्दांगन की साहित्यिक परंपरा को दर्शाता है।

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