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पर्यावरण संरक्षण को समर्पित “Ethology: An Animal Behaviour” पुस्तक का विमोचन

Bareillylive : पर्यावरण संरक्षण को समर्पित विश्व हरेला महोत्सव के अवसर पर आयोजित संगोष्ठी के दौरान डॉ. मनोज कांडपाल की 11वीं पुस्तक “Ethology: An Animal Behaviour” का विमोचन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि असीम अरुण (समाज कल्याण राज्य मंत्री, स्वतंत्र प्रभार उत्तर प्रदेश) उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता महात्मा ज्योतिबा फुले रोहेलखंड विश्वविद्यालय, बरेली के कुलपति प्रो. के.पी. सिंह ने की।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में गोपाल आर्य (अखिल भारतीय पर्यावरण प्रमुख) ने विचार व्यक्त किए। विशिष्ट अतिथि के रूप में स्वतंत्र प्रभार मंत्री डॉ. अरुण कुमार, महापौर बरेली डॉ. उमेश गौतम, प्रेम प्रकाश अग्रवाल, विश्व हरेला परिवार के अध्यक्ष डॉ. हरीश भट्ट, गूंज फाउंडेशन के प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व पुलिस उपाधीक्षक जगदीश सिंह पाटनी, डॉ. विमल भारद्वाज, डॉ. विनोद पागरानी, डॉ. दीप पंत, भवानी दत्त जोशी, प्रो. त्रिलोचन शर्मा, प्रो. ज्योति पांडेय, डॉ. अनिल बिष्ट, बृजेश मिश्रा, आशा कांडपाल, मनसा मिश्रा, श्री प्रकाश पाठक, डी.एस. धनिक एवं डॉ. रीता कांडपाल सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

डॉ. मनोज कांडपाल की इस पुस्तक का उद्देश्य स्नातक, परास्नातक एवं शोधार्थी छात्रों के लिए एथोलॉजी अर्थात् प्राणियों के व्यवहार को जानना और समझना है। इसमें वैज्ञानिक अध्ययन के माध्यम से बताया गया है कि किस प्रकार जानवर प्राकृतिक वातावरण में एक-दूसरे के साथ व्यवहार करते हैं। एथोलॉजी न केवल जानवरों के व्यवहार को समझने में सहायक है बल्कि उनके संरक्षण और संवर्धन में भी उपयोगी है

लेखक डॉ. मनोज कांडपाल ने बताया कि “यह पुस्तक अंडरग्रेजुएट विद्यार्थियों के लिए बेहद लाभकारी है क्योंकि यह उन्हें पशु व्यवहार विज्ञान की मूलभूत अवधारणाओं से परिचित कराती है। विद्यार्थी इससे न केवल पाठ्यक्रम के तहत विषयवस्तु को गहराई से समझ पाएंगे बल्कि रिसर्च और प्रोजेक्ट कार्यों में भी इसका सीधा लाभ उठा सकेंगे। इसके अतिरिक्त यह पुस्तक उन्हें पर्यावरण संरक्षण, वन्यजीव प्रबंधन और पारिस्थितिकी से जुड़े करियर विकल्पों की ओर भी प्रेरित करेगी।”

डॉ. कांडपाल ने कहा कि पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित करने के लिए विलुप्तप्राय प्रजातियों के व्यवहार को समझना आवश्यक है। इसके माध्यम से आवास संरक्षण की प्रभावी रणनीतियाँ और योजनाएँ विकसित की जा सकती हैं।

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