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… इतना सुनकर खुल गया जन्नत का दरवाज़ा हुसैन

mushayara at khankah e niyaziaबरेली। हर साल की तरह शहीदे करबला नवासा-ए-हुसैन आलैहिस्सलाम व उनके 72 साथियों के साथ तीन दिन की भूख-प्यास के आलम में दीन व इन्सानियत की हिफाज़त के लिये दी गई शहादत को याद किया गया। इस मौके पर शानदार आल इण्डिया तरहई मनक़बती मुशायरा हज़रत इमाम हुसैन की शान में आयोजित किया गया।

मुशायरा शब्बू मियां की सरपरस्ती व कासिम मियां की सदारत फहमी बरेलवी की निज़ामत व मुतावल्ली मो0 ज़ाफर के एहतेमाम में आयोजित किया गया। मुशायरे में हिन्दोस्तान के नाम चीन शायरों ने अपने कलाम पेश किये।

मुशायरे के सदर कासिम नियाज़ी ने पढ़ा-
करबला में रब्बे अकरम ने यह फरमाया हुसैन।
होएगा रोज़े जज़ा तक अब तेरा चाहा हुसैन।
मुशायरे के कन्वीनर जाहिद मियां नियाज़ी ने पढ़ा –
आशिके मौला ने अब नारा लगाया या हुसैन।
इतना सुनकर खुल गया जन्नत का दरवाज़ा हुसैन।।

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