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हिंदू एकता का संकल्प: कालिका मंदिर में शिव हिंदू समिति ने कराया भव्य सम्मेलन

Bareillylive : शिव हिंदू सम्मेलन समिति बरेली ने बृहस्पतिवार को ब्रह्मपुरा स्थित कालिका मंदिर चौक पर हिंदू सम्मेलन का भव्य आयोजन किया। इस एकदिवसीय कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य हिंदू एकता को मजबूत करना और सनातन धर्म की मूल भावना को जीवंत रखना था। सैकड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में आयोजित इस सम्मेलन में वक्ताओं ने एकजुटता का संदेश देते हुए समाज को नई दिशा प्रदान की।

कार्यक्रम की शुरुआत मंगल पाठ और दीप प्रज्वलन से हुई। मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला प्रमुख अरविंद जी ने सनातन धर्म की परिभाषा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म केवल एक मजहब नहीं, बल्कि जीवन पद्धति है जो सभी को समानता, न्याय और कर्तव्यनिष्ठा का पाठ पढ़ाता है। उन्होंने उपस्थितजनों से अपील की कि जाति-धर्म की संकीर्णताओं से ऊपर उठकर हिंदू एकता को प्राथमिकता दें, ताकि समाज मजबूत बने।

अचार्य राजेंद्र तिबारी जी ने ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य समुदायों को संबोधित करते हुए कहा कि एकजुटता ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने ऐतिहासिक उदाहरणों का हवाला देते हुए जोर दिया कि विभाजन हमारा सबसे बड़ा शत्रु है। रूहेलखंड विश्वविद्यालय की प्रोफेसर अनीता त्यागी ने महिलाओं की भूमिका पर बल देते हुए मातृ शक्ति को जागृत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति ही परिवार और समाज की नींव है, इसे सशक्त बनाना हमारा कर्तव्य है।

विनोद व्यास और सुनील अग्रवाल ने भी अपने विचार रखे। व्यास जी ने धार्मिक ग्रंथों के संदर्भ से एकता का महत्व बताया, जबकि अग्रवाल ने सामाजिक सद्भाव पर जोर दिया। कार्यक्रम को और रंगीन बनाने के लिए कवि रोहित राकेश ने अपना काव्य पाठ किया, जिसमें हिंदू एकता और देशभक्ति के भाव भरे थे। संतर विद्या शिशु मंदिर के बच्चों ने देशभक्ति गीत और नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

सम्मेलन का समापन सम्मान समारोह के साथ हुआ। आयोजक श्री केशव गुप्ता, उपाध्यक्ष दीपेंद्र वर्मा, दीपक शर्मा, नवीन कक्कड़, अलोक सैनी, श्री जगदीश प्रसाद और कैप्टन अरुण अग्रवाल को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इस अवसर पर अलोक सैनी, अमित वर्मा, श्रीमती पल्लवी शर्मा, सत्य प्रकाश, नवीन कक्कड़, दीपेंद्र वर्मा, माधवेंद्र वर्मा, मुरारी लाल सहित बड़ी संख्या में गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

यह सम्मेलन न केवल धार्मिक एकता का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक जागरण का भी संदेशवाहक सिद्ध हुआ। समिति ने घोषणा की कि भविष्य में ऐसे और कार्यक्रम आयोजित होंगे।

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