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सज़ा मंच, पहुंचीं टीम, किरदार तैयार, थियेटर फेस्ट के पहले दिन वन मंत्री करेंगे उद्घाटन

BareillyLive : रंगालय एकेडमी ऑफ आर्ट एंड कल्चर सोसाइटी बरेली द्वारा 15 दिवसीय थिएटर फेस्ट 10 सितम्बर से 24 सितंबर तक लोक खुशहाली चैरिटेबल ट्रस्ट सभागार, निकट खुशलोक हॉस्पिटल, स्टेडियम रोड बरेली में आयोजित हो रहा है, जिसमें ना केवल उत्तर प्रदेश बल्कि दिल्ली, कोलकता, राजस्थान, गुजरात के भी कलाकारों की मंडली अपने अभिनय की छाप छोड़ने बरेली की इस सरजमीं पर आ रहीं हैं। इस फेस्ट को कराने का कारण स्पष्ट करते हुए आयोजक शैलेन्द्र कुमार कहते हैं कि बरेली अब कलाकारों की कदर करता है हर तरह का कलाकार आज हमारे शहर में हैं, नाटक को समझने वाले जिज्ञासु दर्शको की कारण ही आज बरेली में कई ऑडिटोरियम हैं, बरेली के काफ़ी कलाकार मुंबई में भी काम कर रहे हैं, हमारा मकसद शहर के दर्शकों को अलग तरह का थियेटर दिखाना है इसलिए ये फेस्ट कराया जा रहा है। आप सभी से निवेदन है कि नाटकों की इस श्रंखला का हिस्सा बने।

बरेली पहुंचीं कोलकाता की टीम

खुशलोक ट्रस्ट सभागार में आज से शुरू होने जा रहे थियेटर फेस्ट के प्रथम दिन के नाटक का नाम लेटर्स टू दा आनबर्न चिल्ड्रन ऑफ़ फ़ातिमा जहान है जिसे कोलकाता के संतोषपुर अनुचिंतन दल द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा, जिसके निर्देशक डॉ. गौरव दास हैं। “लेटर्स टू दा आनबर्न चिल्ड्रन ऑफ़ फ़ातिमा जहान” नाटक एक छोटे से गांव की एक लड़की की उथल-पुथल भरी भावनात्मक यात्रा को दर्शाता है। थियेटर फेस्ट का उद्घाटन वन व पर्यावरण मंत्री डॉ अरुण कुमार शाम 7 बजे करेंगे।

“लेटर्स टू दा आनबर्न चिल्ड्रन ऑफ़ फ़ातिमा जहान” एक कहानी है पंजाब के एक छोटे से गांव की लड़की फातिमा की जो अपनी जवानी में अकरम नामक एक लड़के पर मोहित होकर, उसके साथ अवैध संबंध में लिप्त हो जाती है। जिसके परिणाम स्वरुप वह बिना विवाह के गर्भवती हो जाती है। अब अगर उसके माता-पिता को इस बारे में पता चला तो क्या होगा, परिणाम भुगतने के डर से फातिमा अकरम के साथ मुंबई भाग जाती है, जहां अकरम उसे जुल्मी बाई द्वारा संचालित वेश्यालय में बेच देता है। वेश्यालय में उसका पहला गर्भपात होता है और वह अपना पहला पत्र अपने अजन्मे बच्चे को लिखती है जिसे वह पैदा करना चाहती थी और जिसके लिए वह तरसती थी। जैसे-जैसे दिन बीतते हैं, फातिमा हुस्न-ए-शबनम नामक एक प्रसिद्ध बार डांसर बन जाती है और अंडरवर्ल्ड डॉन फिरोज खान के साथ उसकी प्रेम कहानी का आगाज़ होता है। एक बार फिर फातिमा फ़िरोज़ के बच्चे से गर्भवती हो जाती है जो उससे शादी करने का वादा करता है लेकिन दुबई में पुलिस मुठभेड़ में मारा जाता है। फातिमा पुलिस मुठभेड़ से भागते समय गर्भपात के कारण अपने दूसरे बच्चे को खो देती है और एक बार फिर अपने अजन्मे बच्चे के लिए एक पत्र लिखती है। फातिमा आत्महत्या करने की कोशिश में पश्चिम बंगाल के नदिया के तट पर आ जाती है। यहाँ उसकी मुलाकात उसके तीसरे प्रेमी हरिमाधव से होती है। जैसे ही फातिमा धीरे-धीरे हरिमाधव के प्रेम में ढलने लगती है और संपूर्ण रूप से हरिमाधव की समर्पित पत्नी बन जाती है। वह गांववालों विशेष रूप से गांव के पंडित महाराज की आँखों में चुभने लगती हैं, जो हरिमाधव के साथ उसके रिश्ते को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे थे। जैसे ही हरि माधव फातिमा की गर्भवती होने की खबर से उत्साहित हो जाता है, उस को संगीत के मंच पर महाराज और उनके लोग जिन्दा जला देते है। इस समाचार से उत्पन्न संकट के कारण उसका तीसरा गर्भपात हो जाता है और वह अपने तीसरे बच्चे को खो देती है। नाटक फातिमा द्वारा अपने तीसरे अजन्मे बच्चे को आखिरी पत्र लिखने के साथ समाप्त होता है।

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