Bareillylive : एकलव्य देहरादून थिएटर ग्रुप की ओर से मंचित नाटक ‘मेरा राजहंस’ ने दर्शकों के दिलों को छू लिया। यह नाटक मात्र नाटक नहीं, बल्कि वरिष्ठ पत्रकार सुधीर विद्यार्थी जी के जीवन की सत्य घटना पर आधारित उनका संस्मरण है। पिता-पुत्र के गहरे बंधन और चिकित्सा व्यवस्था की पोल खोलने वाली यह प्रस्तुति दर्शकों को भावुक कर गई।
नाटक का केंद्र बिंदु मुख्य पात्र सुधीर है, जो अपने मृत पुत्र चंदन की यादों में डूबा रहता है। चंदन की मृत्यु अल्पायु में एक सड़क दुर्घटना में हो गई, जिसने सुधीर को पुत्र वियोग की असहनीय पीड़ा में अकेला छोड़ दिया। जन्म से ही कई बीमारियों से जूझते चंदन ने हंसते-मुस्कुराते हर दर्द का सामना किया। नाटक के माध्यम से सुधीर विद्यार्थी ने न केवल अपनी व्यक्तिगत त्रासदी बयां की, बल्कि देश की चिकित्सा व्यवस्था पर तीखा तंज भी कसा। यह कहानी अंततः पिता की उस गहन पीड़ा को उजागर करती है, जो शब्दों से परे है।
मंच पर अखिलेश नारायण ने सुधीर की भूमिका निभाई, जिसकी अभिनय कला ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मंच पार्श्व में प्रकाश संयोजन ऋतिक सिमल्टी ने किया, जबकि संगीत संरचना सुप्रिया मौलिक की रही। प्रस्तुति नियंत्रण का दायित्व जागृति कोठारी ने संभाला। नाटक के दौरान प्रख्यात कलाकार श्री देव मूर्ति जी विशेष रूप से उपस्थित रहे और प्रस्तुति की भूरि-भूरि सराहना की। उन्होंने कहा, “यह नाटक जीवन की कठोर सच्चाई को इतने संवेदनशील तरीके से पेश करता है कि हर दर्शक खुद को उस पीड़ा से जोड़ लेता है।”
एकलव्य देहरादून का यह प्रयास सामाजिक मुद्दों को थिएटर के जरिए उठाने का बेहतरीन उदाहरण है। चंदन जैसे हजारों बच्चों की कहानियां चिकित्सा सुविधाओं की कमी से प्रभावित होती हैं, और यह नाटक उसी दर्द को आवाज देता है। दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से नाटक का स्वागत किया, जो साबित करता है कि सच्ची कहानियां कभी पुरानी नहीं होतीं। आने वाले समय में एकलव्य ग्रुप ऐसी और प्रस्तुतियां लाने का वादा करता है।






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