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ऋषि-मुनियों की तपस्या से पवित्र बनी देश की संस्कृति को बचाना होगा : वसीम बरेलवी

Bareillylive : मानव सेवा क्लब के तत्वावधान में शनिवार को फूटा दरवाजा स्थित मशहूर शायर प्रो. वसीम बरेलवी के निवास पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी का मुख्य विषय रहा—वर्तमान परिवेश में भारतीय संस्कृति और सभ्यता की रक्षा की आवश्यकता। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. वसीम बरेलवी ने कहा कि भारत की धरती ऋषि-मुनियों की घोर तपस्या से पावन और सुगंधित हुई है। इसी धरती की पवित्रता और महान संस्कृति को संजोकर रखना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। उन्होंने कहा कि जब तक हम अपनी संस्कृति से जुड़े रहेंगे, तब तक हमारी पहचान विश्व पटल पर उज्जवल बनी रहेगी।

मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित लाल बहादुर शास्त्री इंस्टीट्यूट के पूर्व निदेशक प्रो. राजेन्द्र भारती ने कहा कि भारत की सभ्यता और परंपराएं अनुकरणीय हैं। पश्चिमी देशों की अंधी नकल करके हम अपनी अस्मिता को सुरक्षित नहीं रख सकते। नई पीढ़ी को भारतीय संस्कारों की शिक्षा देना ही आज का सबसे बड़ा दायित्व है। उन्होंने भारतीय संस्कृति की जड़ों को मजबूत करने के लिये पारिवारिक और सामाजिक स्तर पर प्रयासों की आवश्यकता बताई।

कवि इन्द्रदेव त्रिवेदी ने कहा कि संस्कृति को बचाने की जिम्मेदारी केवल सरकार या संस्थाओं की नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की है। उन्होंने कहा कि जब तक हम स्वयं अपने मूल्यों का सम्मान नहीं करेंगे, तब तक उन्हें दूसरों से बचाने की उम्मीद भी व्यर्थ होगी। गोष्ठी में वक्ताओं ने एकमत होकर इस विचार को रखा कि भारतीय संस्कृति की महानता उसकी सहिष्णुता, मानवीयता और जीवन मूल्यों में निहित है, जिसे आज के परिवेश में पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है।

इस अवसर पर मानव सेवा क्लब की ओर से प्रो. वसीम बरेलवी को शाल, पगड़ी और हार पहनाकर सम्मानित किया गया। क्लब के संरक्षक इं. के.बी. अग्रवाल, अध्यक्ष सुरेन्द्र बीनू सिन्हा, महासचिव प्रदीप माधवार, प्रकाश चंद्र सक्सेना, डा. प्रणव गौतम और मुकेश सक्सेना ने संयुक्त रूप से सम्मान-अर्पण किया। गोष्ठी का संचालन सुरेन्द्र बीनू सिन्हा ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन अरुणा सिन्हा ने किया।

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