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उत्तर प्रदेश : कोरोना वायरस संक्रमण के बाद अब ब्लैक फंगस का हमला, एक दिन में 3 लोगों की मौत

लखनऊ। कोरोना वायरस संक्रमण से उबरे कुछ लोगों पर अब ब्लैक फंगस (Black Fungus) का भी हमला हो रहा है। अभी तक इस तरह के मामले महाराष्ट्र और गुजरात में ज्यादा आ रहे थे पर अब उत्तर प्रदेश में भी यह बड़ा खतरा बन गया है। इसकी चपेट में आने के बाद शुक्रवार को मेरठ में 1 और झांसी में 2 लोगों ने दम तोड़ दिया। विभिन्न अस्पतालों में भर्ती एक दर्जन से अधिक लोगों की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है।

एक तरफ प्रदेश कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से जूझ रहा है, दूसरी ओर अब इसके साथ ब्लैक फंगस यानी म्यूकरमाइकोसिस (Mukaramycosis) ने कोरोना संक्रमण से उबरे लोगों के लिए नया खतरा पैदा कर दिया है। ब्लैक फंगस सबसे ज्यादा उन लोगों के लिए घातक साबित हो रहा है जो कि कोरोना संक्रमित पाए जा चुके हैं और उन्हें मधुमेह (Diabetes) है। ब्लैक फंगस ऐसे लोगों के फेफड़ों, आंखों और दिमाग पर असर डाल रहा है और कई मामलों में मरीजों की जान पर बन  रही है। इसके प्रभाव से लोगों की आंखों में रोशनी भी खत्म हो रही है। यह शरीर में बहुत तेजी से फैलता है और कई अंग बेहद प्रभावित हो सकते हैं।

मेरठ में न्यूटिमा में भर्ती मुजफ्फरनगर के एक मरीज की शुक्रवार को मौत हो गई जबकि होप अस्पताल में भर्ती ब्लैक फंगस के मरीज की आंख खराब हो गई। इस मरीज की आंख को निकालना पड़ा। इसके बाद से मेरठ जिला प्रशासन अलर्ट हो गया है। इसके अलावा मेरठ मेडिकल कॉलेज में ब्लैक फंगस के 5 मरीजों का इलाज चल रहा जबकि हालत गंभीर होने पर 2 दिन पहले एक मरीज को दिल्ली रेफर किया गया था।

झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में भर्ती ब्लैक फंगस के दोनों मरीजों की शुक्रवार को मौत हो गई है। यहां पर मंगलवार को एमआरआइ जांच में 5 लोगों में ब्लैक फंगस होने की पुष्टि हुई थी जिनमें से 2 लोग मेडिकल कालेज में भर्ती थे।

गाजियाबाद में भी ब्लैक फंगस के 4 मरीज मिले हैं। ये चारों राजनगर स्थित हर्ष पॉलीक्लीनिक में इलाज कराने पहुंचे हैं। डॉ.बीपी त्यागी ने बताया कि ब्लैक फंगस कोरोना इलाज के दौरान अधिक स्टेरायड लेने से होता है। कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीजों को यह अपना शिकार बनाता है।

हवा से फैलता है ब्लैक फंगस

 ब्लैक फंगस यानी म्यूकरमाइकोसिस एक ऐसी बीमारी है जो कि किसी व्यक्ति से नहीं बल्कि वातावरण में हवा के माध्यम से सांस लेने पर इंसान के अंदर प्रवेश करता है। खासकर यह बीमारी उन लोगों को होती है जो कि कोरोना संक्रमित हो चुके हैं और उन्हेंं डायबिटीज है। यह बीमारी उनको होती है जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहद ही कमजोर है।

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