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श्रीमद्भागवत के अंतिम दिन कथा व्यास के उद्गार, कथा सुनने से मन की व्यथा होती है दूर

Bareillylive : श्री बांके बिहारी मंदिर बरेली में हो रही श्रीमद्भागवत कथा का गुरुवार को समापन हुआ। कथा वाचक स्वामी श्री धनञ्जय दास जी महाराज ने आखिरी दिन भागवत भक्ति के विविध आयामों पर प्रकाश डाला। इस दौरान पूरा बांके बिहारी मंदिर परिसर ‘बांके बिहारी लाल की जय’ के जयकारों से गूंज उठा। कथा व्यास ने बताया कि श्रीमदभागवत का अर्थ है भगवान में रत, लीन हो जाना। उन्होंने गोपी लीला वर्णन करते हुए उद्धव-गोपी संवाद का रसास्वादन कराया। बताया कि गुरु से मिलने और मंदिर कभी खाली हाथ नहीं जाना चाहिए। आचरण को निष्काम भाव से करते रहना चाहिए, अच्छे भक्त का यही लक्षण है। कथा सुनने से मन की व्यथा दूर हो जाती है, यदि हृदय से कथा सुनेंगे तो आप को खुद ही साक्षात भगवान की अनुभूति होगी।

कथा में मुख्य सहयोग विनोद ग्रोवर, दिनेश तनेज़ा, होशियार सिंह, नितिन भाटिया, अश्वनी अरोड़ा, राजीव भसीन,अशोक गोयल, वैभव गुप्ता व महिला मंडल की कांता अरोड़ा, चंद्रा तनेज़ा, सीमा गुलाटी, कमल भाटिया का रहा।

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