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कांग्रेस नेता अधीर रंजन के फिर बिगड़े बोल, मोदी और शाह को लेकर दिया विवादित बयान

नई दिल्ली। अपने अजीबो-गरीब और विवादास्पद बयानों को लेकर सुर्खियों में रहने और माफी मांगने को लेकर चर्चित लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधऱी ने एक बार फिर विवादित बयान दिया है। इस बार उनका यह विवादास्पद बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री आमित शाह को लेकर है जिसमें उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) का विरोध करते हुए मोदी और शाह पर देश के लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया है।

अधीर रंजन चौधरी ने कहा, “मोदी जी ने जो बात कही उससे ऐसा लग रहा है जैसे कि उन्होंने एनआसी के बारे में कभी नहीं सुना है लेकिन उनके गृह मंत्री ने संसद में कहा था कि एनआसी पूरे देश में लागू किया जाएगा… ये रामू और श्यामू क्या कहते हैं, क्या नहीं कहते हैं इस पर हमको ध्यान देना पड़ेगा क्योंकि ये लोगों को गुमराह करने के मास्टर हैं।”

पहले भी दिए हैं विवादित बयान

अधीर रंजन चौधरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को लेकर पहले भी विवादित बयान दे चुके हैं। एक बार तो उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को घुसपैठिया तक बता दिया था। एनआरसी को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा था, “हिंदुस्तान सबके लिए है। ये हिंदुस्तान किसी की जागीर है क्या? सबका समान अधिकार है। अमित शाह जी, नरेंद्र मोदी जी आप खुद बाहरी हैं। घर आपका गुजरात है, आ गए दिल्ली। वैध-अवैध बाद में पता चलेगा।” चौधरी वित्त मंत्री निर्मला सीतरमण को लेकर भी संसद में विवादित बयान दे चुके हैं। उन्होंने निर्मला सीतरमण को निर्बला कहा था। हालांकि बयान पर हंगामे के बाद उन्होंने माफी मांग ली थी। उन्होंने टैक्स पर चर्चा के दौरान कहा था, “आपके लिए सम्मान तो बहुत है लेकिन कभी-कभी सोचता हूं कि आपको निर्मला सीतारमण की जगह निर्बला सीतारमण कहना ठीक होगा कि नहीं। आप मंत्री पद पर तो हैं लेकिन जो आपके मन में जो है वह कह भी पाती हैं या नहीं।”

वैसे, “बयानवीर” चौधरी ने अपनी और कांग्रेस की सबसे ज्यादा किरकिरी इसी साल अगस्त में लोकसभा में कराई थी। तब जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने को लेकर पेश विधेयक पर चर्चा के दौरान उन्होंने जम्मू-कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मसला बताया था। गौरतलब है कि जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी से लेकर मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी की सरकारें जम्मू-कश्मीर को भारत का अंतरिक मामला बताती रही हैं, यानी भारत सरकार की यह घोषित नीति है कि जम्मू-कश्मीर पूर्णतया भारत का आंतरिक मामला है।

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