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अर्थव्यवस्था डांवाडोलः आरबीआई ने घटाया चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान

नई दिल्ली। अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर हालात डांवाडोल हैं। भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने भी इसके संकेत दिए हैं। केंद्रीय बैंक ने वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए जीडीप (सकल घरेलू उत्पाद) ग्रोथ रेट के अनुमान को घटा दिया है और चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 5 प्रतिशत बताया है। आरबीआई ने इससे पहले अक्टूबर में यह अनुमान 6.1 प्रतिशत बताया था। आरबीआई ने चालू वित्‍त वर्ष की दूसरी छमाही के लिए खुदरा महंगाई दर का अनुमान बढ़ाकर 4.7-5.1 प्रतिशत कर दिया है।

आरबीआई ने अपनी छठी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट में भी कोई बदलाव नहीं किया है। इससे रेपो रेट अब भी 5.15 प्रतिशत पर ही बनी हुई है। इससे पहले अक्टूबर में इस साल की अपनी पांचवीं द्विमासिक समीक्षा में आरबीआई ने रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती की की थी। 

गौरतलब है कि पिछले सप्ताह ही चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही यानी जुलाई से सितंबर के बीच देश की जीडीपी के आंकड़े जारी किये गये हैं। इन आंकड़ों के अनुसार, दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट घटकर 4.5 के स्तर पर रह गई है। इस तरह जीडीपी ग्रोथ की रफ्तार में चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही की तुलना में 0.5 प्रतिशत की गिरावट आई है।

क्या है जीडीपी

सकल घरेलू उत्पाद या जीडीपी या सकल घरेलू आय (जीडीआई) अर्थव्यवस्था के आर्थिक प्रदर्शन का एक बुनियादी माप है। यह एक वर्ष में एक राष्ट्र की सीमा के भीतर सभी अंतिम माल और सेवाओं का बाजार मूल्य है। जीडीपी को तीन प्रकार से परिभाषित किया जा सकता है जिनमें से सभी अवधारणात्मक रूप से समान हैं। पहला, यह एक निश्चित समय अवधि में (आम तौर पर 365 दिन का एक वर्ष) एक देश के भीतर उत्पादित सभी अंतिम माल और सेवाओ के लिए किये गए कुल व्यय के बराबर है। दूसरा, यह एक देश के भीतर एक अवधि में सभी उद्योगों के द्वारा उत्पादन की प्रत्येक अवस्था (मध्यवर्ती चरण) पर कुल वर्धित मूल्य और उत्पादों पर सब्सिडी रहित कर के योग के बराबर है। तीसरा, यह एक अवधि में देश में उत्पादन के द्वारा उत्पन्न आय के योग के बराबर है- अर्थात कर्मचारियों की क्षतिपूर्ति की राशि, उत्पादन पर कर सब्सिडी रहित आयात और सकल परिचालन अधिशेष या लाभ।

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