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अवैध कब्जाः सपा सांसद आजम खान के लक्जरी रिजॉर्ट पर चली जेसीबी

रामपुर। सिंचाईं विभाग के नाले की करीब एक हजार गज जमीन पर अवैध कब्जा कर निर्माण कराने के मामले में प्रशासन ने सपा सांसद व कभी उत्तर प्रदेश में बेहद ताकतवार मंत्री रहे आजम खान पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया। शुक्रवार को एक बड़ी कार्रवाई में प्रशासन ने आजम के लक्जरी हममसफर रिजॉर्ट की दीवार पर जेसीबी चलवा दी। यह बहुचर्चित रिजॉर्ट उसी जौहर विश्वविद्यालय मार्ग पर है जिसकी जमीन को लेकर आजम पर पहले ही दर्जनों मुकदमे दर्ज हो चुके हैं।

सिंचाई विभाग का आरोप है कि रिजॉर्ट में नाले की जमीन पर कब्जा किया गया है। इस कारण बढ़कुशिया नाला बंद हो गया है। सिंचाई विभाग ने इस संबंध में उपजिलाधिकारी सदर प्रेम प्रकाश तिवारी के न्यायालय में वाद दायर किया था। तीन सप्ताह पहले उपजिलाधिकारी ने आदेश जारी किए थे कि अतिक्रमण को हटा दिया जाए लेकिन इसके बाद भी अतिक्रमण नहीं हटाया गया।

शुक्रवार को उपजिलाधिकारी प्रेम प्रकाश तिवारी और एसडीओ सिंचाई सिकंदर खान पूरी टीम के साथ पांच बुलडोजर और भारी पुलिस फोर्स के साथ हमसफर रिजॉर्ट पहुंचे और नाले की जमीन पर बनी दीवार को तोड़ दिया। यह दीवार सिंचाई विभाग की एक हजार वर्ग गज भूमि पर  बनी थी। कार्रवाई के दौरान जौहर यूनिवर्सिटी रोड की ओर आने वाला मार्ग भी दो घंटे बंद रहा। एसडीएम ने बताया कि 300 मीटर की दीवार अभी तोड़ी गई है।

जिलाधिकारी आन्जनेय कुमार सिह ने बताया कि हमसफर रिजॉर्ट में 1000 गज जमीन पर कब्जा किया गया था। यह जमीन पसियापुरा शुमाली से बड़कुसिया नाले की है। नाले पर कब्जे से पानी निकासी में दिक्कत हो रही थी। रिजॉर्ट के पास ही पार्किंग के लिए भी अवैध कब्जा किया गया है। इसका मुकदमा एसडीएम की कोर्ट में चल रहा है।

समाजवादी पार्टी के शासनकाल में आजम खां ने इस लग्जरी रिजॉर्ट का निर्माण करवाया था। आजम के घर से तीन किलोमीटर दूर स्थित करोड़ों की लागत से बने इस रिजॉर्ट का लोकार्पण मुलायम सिंह यादव ने किया था। 

आजम ने लोगों से की थी भावुक अपील

इससे पहले जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर तमाम आरोपों में घिरे आजम खां ने लोगों से एक संदेश के जरिए भावुक अपील की थी। सोशल मीडिया पर वायरल इस लंबी अपील में आजम ने एक-एक मुद्दे पर अपना पक्ष रखने की कोशिश की है। अब्दुल्ला आजम ने पुष्टि की थी कि यह संदेश उनके पिता का ही है।

इस संदेश में आजम ने कहा कि आपके दिमाग़ में बहुत सारे सवाल होंगे लेकिन मेरा जवाब बस इतना है कि जो लोग समझते हैं सबकुछ मिट जाएगा, वे सही हो सकते हैं। लेकिन मैं एक इतिहास लिख गया। एक इंसान गली का बाशिंदा हुकूमतों की मुखालफतों के बावजूद एक अज़ीम उल शान इदारा क़ायम करने में कामयाब हुआ। यूनिवर्सिटी के स्टाफ़ और अपने छात्रों से कहना चाहता हूं कि मैंने इंसानी बिरादरी की जो कराहती हुई तस्वीर देखी है, उसकी दुखन मेरे दुखों से कहीं ज़्यादा है। घड़ी कठिन हो सकती है लेकिन बच्चों सच यह भी है कि सच को मनवाने में देर हो सकती है शिकस्त नहीं। इम्तिहान की इस घड़ी में जिसने जितना साथ दिया, हमें उसका ज़्यादा शुक्रगुजार होना चाहिए। जिन्होंने साथ नहीं दिया या जो डर गए उन पर भी हमको आगे भरोसा करना चाहिए, लेकिन अगर किसी की ग़द्दारी का सबूत आपको मिल जाये तो फिर उसे कभी माफ़ नहीं करना चाहिए क्योंकि यह किसी एक का नहीं आने वाली नस्लों का नुक़सान होगा।

 
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