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सर्वे में अभिभावकों ने कहा- 21 दिन तक कोरोना वायरस का एक भी मामला ना आने पर ही खुलें स्कूल

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने भले ही जुलाई से विद्यालय खोलने का मसला राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों पर छोड़ दिया हो और कुछ राज्यों ने जुलाई से स्कूल-कॉलेज खोलने की बात कही हो पर अभिभावत इससे कतई सहमत नहीं हैं। ज्यादातर अभिभावक नहीं चाहते कि अभी स्कूल खोले जाएं। उनका कहना है कि विद्यालय खुलने पर सामाजिक दूरी (Social distance) का पालन करना मुश्किल होगा। अधिकतर अभिभावकों का कहना है कि 21 दिन तक कोरोना वायरस संक्रमण का एक भी मामला नहीं आने पर ही स्कूल खोले जाएं।

कम्यूनिटी सोशल मीडिया प्लेटफार्म लोकल सर्किल के एक सर्वे में अभिभावकों का यह मत सामने आया है। लोकल सर्किल अपनी यह सर्वे रिपोर्ट केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री, शिक्षा सचिव व विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों को सौंपेगी।

1 से 4 जून तक देश के विभिन्न राज्यों में कराए गए इस ऑनलाइन सर्वे में करीब 18 हजार अभिभावकों ने हिस्सा लिया। सर्वे में शामिल 37 प्रतिशत अभिभावकों ने कहा कि उनके इलाके में 21 दिन तक कोरोना वायरस का कोई केस ना आने पर ही स्कूल खोले जाएं। 20 प्रतिशत अभिभावकों का कहना है कि देश में कोरोना के जीरो केस होने पर ही स्कूल खुलने चाहिए। 16 प्रतिशथ का कहना था कि उनके राज्य में जब कोई नया केस नहीं आए तभी स्कूल खोले जाने चाहिए। 13 प्रतिशत अभिभावकों ने कहा कि वैक्सीन आने पर ही स्कूल खुलें। 11 प्रतिशत अभिभावकों ने कहा कि राज्य अपने एकेडमिक कैलेंडर के हिसाब से विद्यालय खोल सकते हैं जबकि तीन प्रतिशत अभिभावकों ने कहा कि वह नहीं कह सकते कि कब खोले जाएं।

दरअसल, भारत में कोरोना वायरस की स्थिति काफी खराब हो चुकी है। खासकर, मुंबई, अहमदाबाद, पुणे, दिल्ली, इंदौर, जयपुर, आगरा के हालात डराने वाले हैं। प्रवासी मजदूरों की घर वापसी के साथ ही कोरोना उन इलाकों में भी पहुंच गया है जो कुछ दिन पहले तक इससे अछूते थे। कई विशेषज्ञ कह चुके हैं कि देश में कम्युनिटि ट्रंसमिसन शुरू हो चुका है लेकिन सरकार उनकी राय से इत्तेफाक नहीं रखती। कुल मिलाकर यह कहना मुश्किल है कि जुलाई तक हालात सुधरेंगे या नहीं।

लोकल सर्किल का कहना है कि स्कूल खोले जाने की गाइडलाइंस बनाते समय अभिभावकों के पक्ष का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। सर्वें कंपनी के जनरल मैनेजर अक्षय गुप्ता के अनुसार, अन्य देशों के पैटर्न को देखते हुए माता-पिता स्कूल फिर से खोलने के लिए सुझाव दे रहे हैं। बच्चों में जोखिम को कम करने के लिए सावधानीपूर्वक योजना बनाने की जरूरत है।

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