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एकजुटता का संदेश-अखिलेश की रथयात्रा में पहुंचे मुलायम और शिवपाल

samajwadi partyलखनऊ। परिवार में रार के मद्देनजर उपजी अटकलों पर विराम लगाते हुए समाजवादी पार्टी मुखिया मुलायम सिंह यादव और सपा के प्रांतीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की महत्वाकांक्षी रथयात्रा की रवानगी के कार्यक्रम में शिरकत की और कार्यकर्ताओं को एकता का संदेश देने की कोशिश की। कार्यक्रम में सबकी निगाहें हाल में अखिलेश के मुकाबिल नजर आये उनके चाचा शिवपाल पर थीं, लेकिन सपा मुखिया के साथ उनके भी मंच पर पहुंचने से उनकी शिरकत को लेकर उठ रहे सवालों के जवाब खुद-ब-खुद मिल गए। मुलायम ने रथयात्रा को झंडी दिखाकर रवाना किया।

इससे पहले, मुख्यमंत्री अखिलेश ने अपने बड़ों की इस दरियादिली का बड़े सलीके से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि हम (परिवार) अलग-अलग नहीं है। हालांकि उन्होंने अमर सिंह पर परोक्ष हमला करते हुए यह भी कहा कि कुछ लोगों की साजिश की वजह से पार्टी के कदम डगमगाए, लेकिन अब सब एक हैं और नौजवानों से आहवान है कि आज के कार्यक्रम की ही तरह वे आगामी पांच नवंबर को पार्टी के रजत जयंती समारोह में भी पूरे जोश के साथ जुटें। मुलायम ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि समाजवादी पार्टी के सरकार राज्य में एक बार फिर बनेगी।

शिवपाल ने इस मौके पर अखिलेश को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह रथयात्रा सफल होगी और पिछले चार साल के दौरान सपा सरकार द्वारा किये गये विकास कार्यो का संदेश पूरे प्रदेश में फैलाएगी। उन्होंने कहा कि सपा का लक्ष्य है कि प्रदेश में किसी भी कीमत पर भाजपा की सरकार ना बनने पाये और वर्ष 2017 में सपा की एक बार फिर स्पष्ट बहुमत की सरकार बने। शिवपाल ने युवाओं से अपील की कि आगामी पांच नवंबर को पार्टी के 25वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में भी वे पूरे जोश के साथ पहुंचे।

मुलायम सिंह यादव ने भी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को शुभकामनाएं दीं। साथ ही युवाओं को समाजवाद के मूल तत्व और समाजवादी नेताओं के संघर्ष के बारे में जानने की हिदायत दी। उन्होंने कहा कि सिर्फ नारेबाजी से काम नहीं चलेगा। समाजवादियों ने बहुत संघर्ष किया है, लाठियां खायी हैं। खुद वह भी इस दौर से गुजरे हैं। समाजवादी आंदोलन बड़ी कुर्बानी देकर बना है। सपा कुर्बानी और संघर्ष का दल है। युवाओं को इसे सीखना और आत्मसात करना होगा। मुलायम ने कहा कि मुख्यमंत्री की इस रथयात्रा की उन्हें खुशी है। इस यात्रा के बाद प्रदेश में फिर से सपा की भारी बहुमत की सरकार बनेगी।

इससे पहले, अखिलेश ने कहा था कि उनकी सरकार ने अपने घोषणापत्र को जमीन पर उतारा है। आगामी विधानसभा चुनाव केवल उत्तर प्रदेश का चुनाव नहीं है। यह देश की राजनीति बदलने का चुनाव भी है। समाजवादी विचारधारा ही परिवर्तन ला सकती है। यह विचारधारा आगे बढ़ी है और बढ़ेगी भी, क्योंकि यही खुशहाली का रास्ता है। विकास का रास्ता हमें विजय की ओर ले जाएगा। यह धर्मनिरपेक्ष लड़ाई है। मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी रथयात्रा को लेकर युवाओं का उत्साह चरम पर रहा। अलसुबह से ही शहर के लामार्टीनियर मैदान पर लाल टोपी पहने कार्यकर्ताओं का हुजूम उमड़ पड़ा। वर्ष 2012 में इसी मैदान में अखिलेश ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। लखनऊ से उन्नाव तक की रथयात्रा में शुरुआत में करीब पांच हजार वाहन शामिल होंगे।

सपा से हाल में निकाले गये तत्कालीन पार्टी महासचिव रामगोपाल यादव के सांसद पुत्र अक्षय यादव ने कार्यक्रम शुरू होने से पहले कहा, ‘लोग अखिलेश के नाम पर वोट देंगे। हम उन्हीं के नाम पर चुनाव लड़ेंगे और जीतेंगे।’ मुलायम और मुख्यमंत्री के प्रतिद्वंद्वी के तौर पर देखे जा रहे उनके चाचा शिवपाल की मौजूदगी कार्यक्रम का सबसे अहम मौका रही। अखिलेश और शिवपाल के बीच हाल में पाला खिंचने के बाद दोनों ओर से जबर्दस्त तल्खी देखी गयी थी। इसे सपा में सत्ता और उत्तराधिकार के संघर्ष के तौर पर भी देखा गया था।

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