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उत्तर प्रदेश- जिन अभिभावकों के बच्चे कक्षा 9 से 12 में पढ़ते हैं, उनके लिए बहुत जरूरी है यह खबर

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लखनऊ। (School Reopening In UP: COVID-19) अनलॉक 4.0 में भले ही केंद्र सरकार की गाइडलाइन में कंटेनमेंट जोन के बाहर 21 सितंबर 2020 से कक्षा 9 से 12 तक के छात्र-छात्राओं के लिए स्कूल खोलने की अनुमति दी गई हो लेकिन उत्तर प्रदेश में ऐसा नहीं होगा। प्राइवेट स्कूलों के इस फैसले के बाद अब सरकारी स्कूल भी कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों के मद्देनजर फिलहाल नहीं खुलेंगे।

उपमुख्यमंत्री डॉ.दिनेश शर्मा ने पहले ही ऐसे माहौल में स्कूल-कॉलेज खोलने में असमर्थता जता दी थी। इसके बाद माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कोरोना वायर संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्कूल-कॉलेजों को खोलना संभव नहीं है।

ये कहा था उपमुख्यमंत्री डॉ.दिनेश शर्मा ने

डॉ.दिनेश शर्मा ने कहा था कि 21 सितंबर से राज्य में आंशिक रूप से स्कूल खोलने की संभावना बहुत कम है। प्रदेश में कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में कम से कम एक महीने तक तो आंशिक रूप से भी कार्य करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। छात्र-छात्राओं की सुरक्षा सबसे ऊपर है और इससे किसी भी तरह समझौता नहीं किया जा सकता। स्कूलों को खोलने पर फैसला मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में लिया जाएगा।

बेसिक शिक्षा विभाग की ये है तैयारी

बेसिक शिक्षा विभाग ने भी स्कूलों को खोलने के लिए बड़ा निर्णय लिया है। इसके तहत फिलहाल तो ऑनलाइन ही पढ़ाई होगी। इसके लिए एक टाइम टेबल बनाया गया है जिसे स्कूलों के साथ साथ छात्र-छात्राओं को भी दिया जाएगा। टाइम टेबल के हिसाब से ही सभी शिक्षक ऑनलाइन क्लासेज लेंगे।

ऐसे बच्चे जिनके पास ऑनलाइन पढ़ाई के कोई संसाधन नहीं हैं उनके अभिभावकों को सप्ताह में अपने बच्चों का होमवर्क लेने के लिए स्कूल जाना होगा। घर में जो भी पढ़ा लिखा हो जैसे माता-पिता, चाचा-चाची, भाई-बहन वह स्कूल जा सकते हैं।  आदेश के अनुसार विशेषकर ऐसे बच्चे जिनके अभिभावक व्हॉट्सएप से नहीं जुड़े हैं, उन परिवारों में पढ़े-लिखे सदस्यों को सप्ताह में एक दिन विद्यालय बुलाया जाएगा। उन्हें पूरे सप्ताह की शैक्षिक कार्ययोजना व कोर्स के बारे में जानकारी दे दी जाएगी। सोशल डिस्टेंसिंग एवं कोविड 19 के प्रोटोकॉल का अनुपालन करते हुए हर घंटे 10 अभिभावकों को बुलाया जा सकता है। शिक्षकों से कहा गया है कि जब अभिभावक स्कूल आएं तो उन्हें हर वह बात समझाने का प्रयास करें जिससे बच्चों की पढ़ाई हो सके और वे होमवर्क पूरा कर सकें।

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